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हेमंत करकरे क्या वास्तव में शहीद हैं….?

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हेमंत करकरे क्या वास्तव में शहीद हैं…?
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी…

26 नवंबर 2008 की रात मुंबई की गिरगाव चौपाटी रोड पर रुकी कार के भीतर अत्याधुनिक आग्नेयास्त्रों से लैस वो 2 खूंख्वार आतंकी बैठे थे जो उस रात मुंबई की सडकों पर खून की होली खेलने निकले थे और पिछले 2 घंटों में ही मुंबई CST सहित कई स्थानों पर लगभग 60-70 निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार चुके थे.
गिरगांव चौपाटी पर उस रात उस कार का रास्ता रोक कर खड़ी हुई मुंबई पुलिस की टीम के सदस्य असिस्टेंट सब इन्स्पेक्टर तुकाराम ओम्बले इस स्थिति को अच्छी तरह जान समझ रहे थे. हालांकि उनके हाथ में पिस्तौल या रिवॉल्वर के बजाय केवल लाठी थी और अच्छी या ख़राब बुलेटप्रूफ जैकेट तो छोडिए, उनके बदन पर बुलेटप्रूफ जैकेट ही नहीं थी. लेकिन इसके बावजूद तुकाराम ओम्बले ने अपने कदम कार की तरफ और अपने हाथ उन आतंकियों के गिरेबान की तरफ बढ़ा दिए थे. जवाब में आतंकियों की बंदूकों से बरसी गोलियों से छलनी होने के बावजूद उन आतंकियों की कार में घुस गए तुकाराम ओम्बले ने उनमें से एक आतंकी का गिरेबान तबतक नहीं छोड़ा था जबतक उसको कार से बाहर घसीटकर सड़क पर पटक नहीं दिया था. इसी आतंकी की पहचान बाद में अजमल कसाब के नाम से हुई थी.
इसी दिन 26/11 की रात, गिरगांव चौपाटी की इस घटना से लगभग 45 मिनट पहले ही आतंकी कसाब और उसके आतंकी साथी से 8 पुलिस कर्मियों की टीम का सामना हो गया था. टीम का नेतृत्व हेमंत करकरे कर रहे थे. करकरे और उनकी टीम के पास तुकाराम ओम्बले की तरह केवल लाठी नहीं बल्कि आटोमैटिक पिस्तौलें और राइफलें थीं. करकरे और उनकी टीम तुकाराम ओम्बले की तरह केवल सूती कपडे की सरकारी वर्दी नहीं पहने थी, बल्कि बाकायदा बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट पहने हुए थे. बुलेट प्रूफ घटिया थी कहने से काम नहीं चलेगा क्योंकि वो जैकेट चाहे जितनी घटिया रही हो किन्तु तुकाराम ओम्बले की सूती कपडे वाली सरकारी वर्दी से तो हज़ार गुना बेहतर रही होगी.
सिर्फ यही नहीं, गिरगांव चौपाटी पर हुई मुठभेड़ में तो आतंकी कार में, आड़ लेकर बैठे थे जबकि तुकाराम ओम्बले के पास खुली सड़क पर किसी तिनके तक की ओट लेने की गुंजाईश नहीं थी.
जबकि करकरे और उनकी टीम की स्थिति इसके ठीक विपरीत थी.
उनके सामने दोनों आतंकी खुली सड़क पर बिना किसी ओट के खड़े थे और करकरे अपनी टीम के साथ कार के भीतर थे इसके बावजूद उन दोनों आतंकियों ने करकरे समेत उनकी पूरी टीम को मौत के घाट उतार दिया था और करकरे व उनकी पूरी टीम मिलकर उन दोनों को मारना तो दूर उनको घायल तक नहीं कर सकी थी. जबकि निहत्थे तुकाराम ओम्बले ने सीने पर गोलियों की बौछार सहते हुए भी कसाब सरीखे आतंकी को कार के भीतर घुसकर बाहर खींच के सड़क पर पटक दिया था. यह था वो ज़ज़्बा और जूनून जिसने तुकाराम ओम्बले को शहादत के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा दिया.
करकरे और उनकी टीम उन दो आतंकियों का सामना क्यों नहीं कर सकी थी.?
इस सवाल का जवाब देश को आजतक नहीं मिला. संकेत देता हूँ कि जवाब क्यों नहीं मिला था.
दरअसल उनके रक्त के नमूने जेजे अस्प्ताल ने इसबात की जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजे थे कि क्या उन्होंने शराब पी रखी थी.?
फोरेंसिक लैब की जांच का परिणाम क्या निकला था.?
देश को आजतक यह भी नहीं बताया गया.
मित्रों यह कोइ ऐसा रहस्य नहीं था जिसके उजागर करने से देश की सुरक्षा को कोई खतरा उत्पन्न हो जाता. लेकिन देश को यह नहीं बताया गया.
अतः मेरा स्पष्ट मानना है कि, उस रात यदि वास्तव में कोई शहीद हुआ था, जिसकी शहादत के समक्ष पूरा देश सदा नतमस्तक होता रहेगा, तो वो नाम था तुकाराम ओम्बले का.
जबकि हेमंत करकरे और उनकी टीम की मौत उस रात उन आतंकियों के हाथों मारे गए अन्य नागरिकों की तरह ही हुई एक मौत मात्र थी. क्योंकि शहीद वो कहलाता है जो तुकाराम ओम्बले की तरह सामने खड़े दुश्मन पर जान की परवाह किये बिना टूट पड़ता है. इस आक्रमण में हुई उसकी मौत को देश और दुनिया शहादत कहती है.
यदि हेमंत करकरे और उनके साथी शहीद हैं तो फिर उस रात आतंकियों द्वारा मारा गया हर नागरिक शहीद है.
आज यह विवेचन इसलिए क्योंकि कांग्रेसी इशारे पर साध्वी प्रज्ञा के साथ हेमंत करकरे द्वारा किये गए राक्षसी अत्याचारों और फर्ज़ीवाड़े की अदालत और जांच में उडी धज्जियां के बाद उजागर हुई अपनी साज़िशों पर पर्दा डालने के लिए कांग्रेस ने यह विधवा विलाप प्रारम्भ किया है क़ी साध्वी प्रज्ञा की रिहाई से शहीद हेमंत करकरे और उनकी शहादत का अपमान हुआ है.
मित्रों इस देश में अब शहादत का सर्टिफिकेट वो कांग्रेस नहीं बाँट सकती जो सरकारी किताबों में भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद को आतंकवादी और नेहरू को महान स्वतंत्रता सेनानी लिखकर देश के बच्चों के मन में ज़हर घोलती रही हो.

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Game Plan- Create Dissention in each Group that Voted for Modi

From WahtsApp by Pankaj Ojha

मई 2014
मोदीजी pm बन गए
रिपोर्ट आई की
इस बार मोदी को
एक तरफ़ा वोट मिला
1) नोजवानों से ,
खासकर कॉलेज छात्रों से
2) कमजोर तबकों से,
खासकर दलितों से
3) हिन्दू समाज से,
खासकर मध्यम वर्ग से
4) गुजराती लोगों से,
खासकर पटेलों से
5) मुस्लिम समाज से,
खासकर गरीब मुस्लिम से
6) महिलाओं से,
खासकर धर्मप्रेमी महिलाओं से
7) व्यापारी वर्ग से,
ख़ासकर छोटे मझोले वर्ग से
8) देश के थिंकटैंक से,
खासकर बुद्धिजीवी वर्ग से
ऐसे कई कई वर्गों ने अपनी
पुश्तैनी राजनीतिक निष्ठां
को दरकिनार कर मोदी को
वोट दिया। कश्मीर से
कन्याकुमारी तक यही देखने में
आया।
हर राजनीतिक दल इसे महसूस कर
पाया,
पुरे भारतवर्ष में।
इसका तोड़ निकाला गया।
नतीजा आज आपके सामने है।
हर उस वर्ग को सबसे पहले
चिन्हित किया गया जिसने
मोदी को एक तरफ़ा वोट
दिया। फिर उस वर्ग की
“दुखती नस” मार्क की गई और
खेल शुरू हुआ।
बेहद सटीक और बारीकी से
चुन चुन कर इन वर्गों को टारगेट
करना शुरू हुआ।
किरदार लिखे गए और
हर वर्ग को एक टार्गेटेड
किरदार दिया गया।
उसकी टाईमिंग तय की गई।
और अपने हाथ में रिमोट रखा
प्रमुख विपक्षी दल ने ।
भांड मीडिया इसमें अहम रोल
अदा करने वाला था।
मकसद इन सबका एक था-
हर वर्ग को तोडना,
हर वर्ग को जहर से भरना,
हर वर्ग को छिन्न भिन्न करकें
रखना ,
ताकि फिर वो भविष्य में,
कभी एक होकर,
मोदी को वोट ना दे
अब आप खुद इस बड़े से खेल को
समझिये,
इनकी परफेक्ट टाइमिंग को
समझिये,
इनके वेल प्लेसड किरदारों को
देखिये,
बेहद खूबसूरत स्क्रिप्ट को
पढ़िए। हर बयान की एक परफेक्ट
टाइमिंग
स्पष्ट रखी दिखेगी।
1) नोजवानों के लिए
JNU वाला उमर खालिद
किरदार
2) दलित वर्ग के लिए
रोहित वेमुला वाला किरदार
3) हिन्दू वर्ग के लिए
फ़िल्मी खान वाला किरदार
4) गुजरती पटेलों के लिए
हार्दिक पटेल वाला किरदार
5) मुस्लिमो के लिए
अख़लाक़ वाला किरदार
6) महिलाओं के लिए
शनि शिंगापुनकर वाली
किरदार
7) व्यापारी वर्ग के लिए
GST वाला किरदार
8) बुद्धिजीवी वर्ग के लिए
असहिष्णडू वाला किरदार
मजे और आश्चर्य की बात यह की
इसमें नया कुछ भी नही है। वर्षो
से समाज में चली आ रही
बुराइयों को ही आधार बनाया
गया है।
सिर्फ मोहरे बदल कर
नए वो किरदार लाये गए हैं
जो जवान है
जोश से भरपूर हैं।
ये तो बानगी है उन किरदारों
की अब तक सामने आ गए हैं।
भविष्य में और भी सामने आएंगे ,
अपनी परफेक्ट
स्क्रिप्ट और टाइमिंग के साथ।
आपको ,
हमको ,
हिंदुस्तान,
को तोड़ने की साजिश के साथ।
सजग रहिएगा
होश से काम लीजिएगा
अपने विवेक को
मरने न दीजियेगा
अपनी एकता बनाये रखना
किसी भी उकसावे में न फँसना
हम “अनेक” थे
हम “अनेक” हैं
हम “अनेक” ही रहेंगे
अपनी इसी
“अनेकता में एकता”
में हमारी ताकत और
सुनहरा भविष्य निहित है
हमारी सोच और कल्पना से भी
आगे/बड़े ,
इस गेमप्लान की हवा को,
सिर्फ हमारी
शालीन ,गरिमापूर्ण,
मजबूत एकता से ही निकला जा
सकता है।
धीरज संयम रखकर,
मोदीजी को आपका और आपके
बच्चों का
सुनहरा भविष्य बनाने का
मौका दीजिये
क्योंकि वे अब तक की हर
अग्निपरीक्षा में सफल हुए हैं

My comments: BEWARE of the Wolves. Stay United. 2019 battle has already started. Take this message to every home and also to BJP leaders in your area.

An Open Letter to Rahul Gandhi

Source Unknown. WhatsApp by Hiren Megha

🙏कोई पहुंचा दो मेरा ये ख़त 🙏
प्रति,
राहुल गांधी
सांसद/ महासचिव
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

राहुल जी, आज आप का #JNU में दिया भाषण सुना और मजबूर हुआ ये पत्र लिखने को।आज आपने महज दो हजार छात्रो के सामने ही भाषण नहीं दिया बल्कि आपने छात्र के लिबास में वहां घूम रहे राष्ट्र विरोधी ताकतों को भी सम्बल प्रदान कर दिया कि हिंदुस्तान मुर्दाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने पर उस राजनैतिक दल को कोई आपत्ति नहीं है जिसने आजादी के बाद 60 सालो तक इस देश की कमान संभाली है और भविष्य में भी इस देश की कमान सँभालने को अपना स्वाभाविक हक़ मानती है।

राहुल,आपने #JNU में कहा कि छात्रो की आवाज दबाने वाला सबसे बड़ा राष्ट्रद्रोही है। आपका मतलब हिंदुस्तान की न्यायपालिका ने आप की ही सरकार के दौरान जिस आतंकवादी अफजल गुरु को फाँसी दी थी उसको नाजायज मान कर उसे शहीद का दर्जा देने वाले राष्ट्रद्रोही पर अगर सरकार कार्यवाही करती है तो क्या वो सरकार राष्ट्रद्रोही सरकार है।

#Rahulgandhi जी आप ने कहा कि युवा अपनी बात कहते है तो सरकार उन्हें देशद्रोही कहती है। आप का मतलब है कि “कितने अफजल तुम मारोगो-हर घर से अफजल निकलेगा” के नारे लगाने वाले और… “हमको चाहिए आजादी” के नारे लगाने वालो को सरकार ताम्रपत्र से सम्मानित करना था ?

रोलिंस कालेज से स्नातक और केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से मिली एम्फिल की डिग्री आप को किस पढाई पर मिली मैं ये नही जानता पर इतना जरूर लगता है कि आज का आप का भाषण न आपकी दादी स्व.इंदिरा गांधी को पसंद आया होगा और न आप के पिता स्व.राजीव गांधी को।उन्हें भी आज शायद यही लगा होगा की उन्हें आप को हिंदुस्तान के किसी सरकारी स्कूल में पढ़ाना था जहाँ और कुछ पढ़ाया जाय या न पढ़ाया जाय… राष्ट्रभक्ति के भाव और उसका प्रकटीकरण जरूर सिखाया जाता है।

आप मेरी इस समीक्षा को मेरे भाजपाई होंने से जोड़ कर प्लीज ख़ारिज मत कीजियेगा। हाँ मैं हूँ भाजपाई….#BJP …। पर भाजपाई होने से पहले एक हिंदुस्तानी हूँ और आप ने आज मेरे जैसे करोडो हिन्दुस्तानियो का दिल दुखाया है।हिंदुस्तान को गाली और पाकिस्तान के लिए दुआ मांगने वालो के साथ आप का खड़ा होना वाकई एक सच्चा हिंदुस्तानी होने की वजह से शर्म से आज मेरा सर झुक गया।

आज आपके एक भाषण ने वो कर दिया जो पाकिस्तान की पूरी आईएसआई और सैकड़ो हाफिज सईद नहीं कर पाये…। वो है हम हिंदुस्तानियो का मनोबल तोड़ना…देश के सैनिको के मन में इस प्रश्न को पैदा करना कि वो अपनी जान की बाजी किसके लिए और क्यों लगा रहे है..?

मैंने सीताराम येचुरी को कोई पत्र नहीं लिखा क्यों कि वो वही कह रहे है जिसकी मुझे उनसे उम्मीद थी…पर आप से इस भाषण की उम्मीद नहीं थी मुझे।#sitaramyechury

राहुल जी..आप नरेंद्र मोदी से नफरत कीजिये वो आप का हक़ है पर..देश से आप प्यार करेंगे ये तो उम्मीद हम रख सकते है न…..आप भारतीय जनता पार्टी को खूब भला बुरा बोलिये…वो भी आप का हक़ है मगर…राहुल जी… देश को भला बुरा बोलने वालो के साथ आप नहीं खड़े होंगे ये उम्मीद तो हम रख ही सकते है न…फिर क्यों…आखिर क्यों..??

राहुल जी #JNU मामले में आप दो दिन चुप रहे तो लगा कि आप भी भारत जिंदाबाद करने वालो के साथ है…मगर जब आपने बोला तो अफसोस… आपने देश को आतंकवाद के मामले में दो भाग में बाँट दिया…।

भारत की विश्व भर में आतंकवाद के मुद्दे पर छेड़ी गई लड़ाई को घरेलू मोर्चे पर ही आपने कमजोर कर दिया।

जरा सोच के देखियेगा कि आप के एक भाषण ने कश्मीर मुद्दे पर भारत को कितनी क्षति पहुचाई है ?

इशरत जहाँ आतंकवादी थी ये हेडली की गवाही से एक बार फिर साबित हुआ है। अब आप अपनी और अपनी पार्टी के पिछले बयानों और क्रियाकलापो पर चिंतन कीजिए। नफरत के हद तक मोदी विरोध की तीब्र इच्छा और प्रयास ने आप को देश द्रोहियो के कवच-कुंडल की तरह तो नहीं खड़ा कर दिया है…? चिंतन कीजिये

मुझे आप की राष्ट्रभक्ति पे प्रश्नचिन्ह लगाने का कोई हक़ नहीं है और न मैं कोई प्रश्नचिन्ह लगा रहा हूँ…। मुझे आपकी राष्ट्रभक्ति के प्रकटीकरण के उस तरीके पर एतराज है जो दुश्मनो का मनोबल बढाये और राष्ट्रभक्तो का मनोबल तोड़े। ये तब भी होता है जब देश का प्रधानमंत्री विश्व मंच पर आतंकवाद के खात्मे का नारा दे कर पूरे विश्व को एक करता है और उसके घर लौटने से पहले आप उसकी छिछालेदर में जुट जाते है।

दिग्विजय सिंह की क्लास में जहाँ आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को “ओसामा जी” कह कर बुलाने की शिक्षा दी जाए वो क्लास ठीक नहीं है।

राहुल जी अभी एक न्यूज़ चॅनल ने दिल्ली में सर्वे कराया जिसमे उसने आप की लोकप्रियता सात प्रतिशत बताई।मुझे लगता है कि यह आंकड़ा दिल्ली में आपकी पार्टी को मिलने वाले व्होट प्रतिशत से भी बेहद कम है।आप और आपकी पार्टी ने इस सर्वे को नकारा नहीं है। तो अगर ये सर्वे सही है तो भाजपाई हो कर भी मेरी सलाह है कि आप अपने काम करने का बाकी तरीका बदले या न बदले मगर अपनी राष्ट्रभक्ति के प्रस्तुतिकरण के तरीके पर आत्मचिंतन अवश्य कीजिये।क्यों कि अगर आपके इस प्रगटीकरण और भाषण से हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी पाकिस्तान में बैठ कर खुश हो रहे है तो कही न कही कुछ गड़बड़ जरूर है…।

और कुछ नहीं तो अपने भाषण लिखने वाले को तो आज ही बदल डालिये.. प्लीज ….

भवदीय
एक राष्ट्रभक्त

Dear Mr. Shourie (from Gaurang Vaishnav)

Dear Dr. Arun Shourie:

Namaste.  A few days back you came down hard on Modi government. You made an uncharitable remark that “The Modi government believes that managing economy means “managing the headlines” and that people have started recalling the days of former Prime Minister Manmohan Singh.” I didn’t like it but you are an expert on the subject and I am not, so I swallowed it. You further said, “The way to characterize policies of the government is – Congress plus a cow. Policies are the same.”  http://m.timesofindia.com/india/This-government-is-Congress-plus-a-cow-Arun-Shourie-says/articleshow/49544316.cms?utm_source=facebook.com&utm_medium=referral&utm_campaign=TOI

That was a cheap pot shot and insulting to Hindu sensitivities. Yet, I let it ride thinking that even the best of the people lose balance sometimes in anger and say things that they later regret.

People have surmised that you are frustrated because you were not given a ministerial position in the new government, not even a place in the Niti Ayog. I didn’t agree with that assessment. I didn’t think you were that petty and hunkering after name and fame.

Having known your contribution to BJP and your scholarly and philosophical mind, having read your books, I have held you in high regards for decades, so I did not want to label you as another Modi hater just because of that one interview.

Then came another of your interviews with NDTV. It opened my eyes and changed my perception.  I want to pick only a few points from that interview and tell you that Mr. Shourie, you are wrong.

http://www.indiatvnews.com/politics/national/pm-modi-keeping-silent-just-to-win-bihar-elections-arun-shourie-33514.html

(1) “Prime Minister Narendra Modi is deliberately maintaining silence on incidents like Dadri lynching while his ministerial and party colleagues kept the issue alive merely to win Bihar elections.”. Maybe he is and that is a prudent way; if you had the good of the country at the heart and didn’t want Congress or its proxy to rear its head again, you would have kept quiet too. And why should he comment? Just because it was a Muslim death? Why did you not mention that he should make a statement also on the murder of Prashant Poojary, a Hindu by Muslims? So you are also falling in media trap of labeling Modiji as a PM of Hindus only.

(2) You cited a Pakistani analyst to say that “while the neighboring country was trying to get out of the pit, India was slowly going down its way.” So now, to you suddenly an analyst from Pakistan carries more weight? And is Pakistan really trying to come out of the pit? It doesn’t look like looking at what they are doing in Kashmir.

(3) You have said “the writers, authors and artists were conscience-keepers of the country and their motives cannot be questioned.”  Ha, ha, ha! So where was their conscience in 1984 Sikh genocide, in 1989 when Pundits in Kashmir were massacred, in 2002 when 58 Hindus were burnt alive at Godhra in a railway coach when Professor Joseph’s hands were cut by the Jehadis in Kerala? So these guys’ motives cannot be questioned but Modi’s can be?

(4) ” Praising scientists like P M Bhargava and Infosys founder N R Narayana Murthy, who have expressed concern over these incidents, you questioned how these people can be called rabid, a term used by Arun Jaitley.”  One only needs to do a Google search on Bhargava to see where his ideological loyalties lie.  Bhargava has been supporting AAP from the very beginning and has leftist, pro-Naxal leanings. He is not a neutral, ‘oh, so ever gentle soul.’ Mr. Murthy is a Ford Foundation Trustee. Do we need to know more?

(5) ” These people have contributed immensely to the country and those who attacked them have not read a book in the last 20 years. Those who cannot write two paragraphs are sitting in judgement over writers.”  This is so absurd an argument that it takes the cake. If we were sitting in judgement of their literary work, the argument would make sense; here we are judging their action of Award Vapasi and political motive behind it, which doesn’t require literary skills but common sense.

Your strident support of politically motivated writers and artists’ return of awards makes it crystal clear that in the last innings of your life, you have thrown away your wicket. You are so enamored with your righteousness that you have lost all sense of proportion. Up until now, I thought that Advaniji was the only icon whom I had held in high esteem and who had failed BJP and the nation at the crucial juncture. Now I know that he is in good (!) company.

I am one of 1.25 billion Bharatiyas. Though I happen to reside away from Bharat, my heart beats for Bharat. I blog, twit and use Facebook. I am not a scholar; I have not written incisive books; I have not been a minister; I have not been a darling of think tanks and conclaves; I am not a speaker; hey, I am not even a member of BJP. Yet, I dare say that Shourie Ji you have lost it. All your lifelong contributions have come to a naught because you have decided to become a tool in the hands of Adharma, i.e., in the hands of anti-Modi, anti-Hindu, and to an extent, anti-Bharat media. It is no different than Bhishma or Dronacharya deciding to side with the Kauravas.

Finally, I can write “more than two paragraphs” and I have read 50 or so book in last twenty years.

May you find peace within.

Gaurang G. Vaishnav

Edison, New Jersey, USA

(facebook: <vicharak1>, twitter: @vicharak1)

Root Cause of all Black Days is Congress

Lok Sabha speaker, Sumitra Mahajan suspended 25 Congress MPs for five sessions for unruly behavior on August 3, 2015. Congress President, Sonia Gandhi called it a “Black Day.”

No Sonia Ji, Black Day was:

  1. When Congress party decided to support Khilafat movement in 1920
  2. When Congress party remained silent when thousands of Hindus were massacred, converted, their women raped and thrown in wells with children by Moplah Muslims of Malabar in 1921, thanks to Gandhiji *
  3. When Gandhiji tried half heartedly with viceroy Irwin for commutation of Bhagat singh’s sentence who was sentenced to death 1931
  4. When Congress decided to consider only first two stanzas of Vande Mataram as the national Song to appease Muslims who opposed stanzas comparing Bharatmata with Goddess Durga 1937
  5. When Gandhiji tried to have Subhas Chandra Bose defeated in election for Congress President (and failed) 1938
  6. When Gandhiji forced out Subhas Chandra Bose from Indian national Congress 1939
  7. When Gandhiji offered Mohmmad Ali Jinha Prime Ministership of Free Bharat with a fee hand to choose his cabinet (i.e., Muslims) 1946
  8. When Congress decided not to make Vande Mataram the national anthem  1947
  9. When Nehru tried to prevent Sardar Patel from leading the project to  rebuild Somanath Mandir, as he considered it a communal act 1947
  10. When Congress allowed partition in 1948
  11. When Gandhiji foisted Jawaharlal Nehru as the Prime Minster, even though out of 14 votes in AICC, Sardar Patel had 12 votes and Nehru one. 1948
  12. When Nehru stopped Sardar Patel from completing operation to free occupied Kashmir from Pakistan’s attack and took the case to UNO 1948
  13. When your party agreed to include article 370 to give special status to Jammu & Kashmir
  14. When Nehru didn’t want the President, Rajendra Prasad to inaugurate restored Somanath Mandir 1951
  15. When Nehru made a statement in Pakistan that “not a blade of grass grows there” in a debate about Bharatiya territory occupied by China 1962
  16. When Nehru lost the war to China 1962
  17. When Nehru asked President Radhakrishnan not to attend funeral of ex President Rajendra Prasad because he was miffed with independence of Rajendrababu and his clear stand on Hindu issues 1963
  18. When Congress government signed Tashkent agreement  and gave away the conquered region in Pakistan occupied national boundary of India and the 1949 ceasefire line in Kashmir.  January 1966
  19. When Indira Gandhi nationalized all banks 1967
  20. When Indira Gandhi signed Simla agreement accepting LOC as de facto International border July 1972
  21. When Indira Gandhi declared Emergency and imprisoned more than 100,000 people including political leaders of all opposition parties (June 26, 1975)
  22. When Sanjay Gandhi forcibly sterilized several thousand villagers and slum dwellers 1976
  23. When Sanjay Gandhi bulldozed slums around Turkman Gate in Delhi leaving those people out in open without any means of survival 1976
  24. When Indira Gandhi inserted the words “Socialist Republic” and “Secular” in preamble of the constitution of Bharat 1975-1976
  25. When Congress packed all education and research institutes with leftist and communist people and distorted history
  26. When Congress decided to name every entity, be it an airport or a park, a dam or a building, a government scheme or a road, to name after one of Nehru Gandhi family members
  27. When Congress government awarded Bharat Ratna to biggest fraud, converting thousands of Hindus to Christianity, “Mother” Teresa 1980
  28. When you became a director of Maruti Cars and an Insurance company while not being a citizen of Bharat in contravention of law
  29. When your name appeared in voters list of New Delhi even when you were not a citizen of Bharat (1980-1982)
  30. When Rajiv Gandhi was appointed Prime Minister in haste, superseding experienced home minister, Pranab Mukherjee 1984
  31. When Congress goons mercilessly murdered thousands of Sikhs after Indira Gandhi was assassinated 1984
  32. When Rajiv Gandhi said about massacre of Sikhs When a mighty tree falls, the whole ground shakes 1984
  33. When Rajiv Gandhi’ government nulled Supreme Court’s judgement in Shah Bano’s alimony case by amending the constitution to appease Mullahs  1986
  34. When Mulayam Singh’s government fired on Karsevaks in Ayodhya and killed several dozens of them 1989
  35. When your favorite sons, the Muslims of Kashmir killed thousands of Hindus, dishonored Hindu women, and forced close to 400,000 Hindus out of Kashmir
  36. When you made a request to not hang your husband’s killers
  37. When Muslims, pampered by your party since 1920, burned to death 59 innocent passengers of Sabarmati Express at Godhra station in Gujarat 2002
  38. When you called a sitting Chief Minister, Narendra Modi, “Maut Ka Sodagar” 2007
  39. When your government awarded Padma Shri to Teesta Setalvad, who should have been in jail longtime ago
  40. When your party went to bat for a known terrorist, Shahbuddin
  41. When your party defended terrorist, Isharat Jahan
  42. When your party coined the word “Hindu Terrorism”
  43. When Rahul Gandhi said that Hindu terrorism was more worrisome than the Jehadi one
  44. When you thrust a puppet Prime Minister, Manmohan Singh on the nation and ruled from behind for 10 years
  45. When you formed National advisory Council (NAC) to supersede powers of the parliament and packed it with known Hindu baiters and communists
  46. When you supported Evangelist in their bid to Christianize Bharat
  47. When MPs of Congress joined other MPs to write a letter to President of USA, not to grant a visa to Chief Minister of Gujarat, Narendra Modi
  48. When Your government turned a blind eye to all the mega scams- Commonwealth games, Coalgate, Telecom Scam, etc.
  49. When your party man, Mani Shankar Iyer called a sitting Chief Minister and Prime ministerial candidate of a major political party, Narendra Modi, a Chaiwala 2013
  50. When you didn’t have decency to congratulate Narendra Modi and BJP for their clear victory in 2014 election
  51. When you and your family ran out of the country to avoid attending International Yoga Day
  52. When your MPs, under your leadership held up working of Lok Sabha for nine consecutive sessions and refused to debate the points you had raised July 2015
  53. When office bearers of Congress party glorified an executed terrorist, Yakub Memon July 2015

So, Edvige Antonia Albina Màino, aka Sonia Gandhi, the root cause of all Black Days of Bharat is your Congress party, going back to as far as 1920! If anything, suspension of 25 of your chamchas, is a Golden day in history of Bharat.

*A conference held at Calicut presided over by the Zamorin of Calicut, the Ruler of Malabar issued a resolution:[23]

“That the conference views with indignation and sorrow the attempts made at various quarters by interested parties to ignore or minimise the crimes committed by the rebels such as: brutally dishonouring women, flaying people alive, wholesale slaughter of men, women and children, burning alive entire families, forcibly converting people in thousands and slaying those who refused to get converted, throwing half dead people into wells and leaving the victims to struggle for escape till finally released from their suffering by death, burning a great many and looting practically all Hindu and Christian houses in the disturbed areas in which even Moplah women and children took part and robbed women of even the garments on their bodies, in short reducing the whole non-Muslim population to abject destitution, cruelly insulting the religious sentiments of the Hindus by desecrating and destroying numerous temples in the disturbed areas, killing cows within the temple precincts putting their entrails on the holy image and hanging skulls on the walls and the roofs.”

Modiphobia Disorder

From WhatsApp:

“Modiphobia Disorder”

A new disease named “Modiphobia disorder” is badly affecting some people in India and some parts of South Asia and Asia region.

Modiphobia disorder is a new disease which is Is found in every Indian Pseudosecular Politician.,a majority in  #Presstitute Media and India’s enemies. This is highest level of Pseudosecular psychopathy. this problem started after 2014 general election in India.

Some Symptoms of this Disease:

In this disease patient sees PM Narendra Modi.everywhere.

Patient thinks of PM Modi’s hand behind every negative incident.

For any incident of robbery, rape or an accident, or any natural disaster patient of Modiphobia disorder is quick to start blaming Modi.

In this Mental illness patients have a lot of dreams and in every dream Narendra Modi Plays role of a villain.

Various stages of disease:

First stage is blind secularism disorder
Second stage is habit of corruption disorder
Third stage is habit of nuisance disorder
Fourth stage is becoming  an #AAPtard
Fifth stage is Hindutvaphobia disorder
Sixth stage is RSSphobia disorder
Seventh stage is Modiphobia disorder

Some popular affected persons in India are Mr Kejriwal, Mr Rahul Gandhi, Mr. Digvijay Singh, Mulayam, Lalu, Sharad yadav, Nitish. and Mostly Congress and AAP leaders. Modiphobia disorder of these people has reached a critical stage. in Asia & South Asia regions this has affected some parst of Pakistan and China.

So be careful about this Disease. if you think you see any type of symptoms in your mind then go and consult with a psychiatrist immediately.(If a psychiatrist in not available, please consult with Amit Shah for quick cure.) 

स्वस्थ रहो सुरक्षित रहो
और जनहित में दुसरो को भी बताओ

Hard copy: योगी के देशराग पर कांग्रेस का विलाप क्यों? Exposing Congress’s Hypocrisy

Some readers could not open the link that was given for this article in a previous post, hence I reproduce it here in full.

प्रवीण दुबे
स्‍वदेश के समाचार संपादक प्रवीण जी गत १८ वर्षों से समसामयिक विषयों पर लेखनरत हैं।

प्रवीण दुबे
”सूप बोले सो बोले छलनी क्या बोले जिसमें बहात्तर छेद देश की सबसे पुरानी और सर्वाधिक समय तक सत्तासीन रहने वाली कांग्रेस और उसकी कुछ पिछलग्गू पार्टियां धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिकता, अल्पसंख्यक संरक्षण जैसे विषयों पर कुछ बोलती हैं तो सहसा ही ऊपर लिखी कहावत याद आ जाती है। वास्तव में कांग्रेस ने आजादी के पहले और आजादी के बाद इन विषयों को लेकर जो चरित्र प्रस्तुत किया क्या उसके चलते उसे इन विषयों पर किसी से भी कुछ भी कहने का अधिकार है?
वर्तमान की बात करें तो कांग्रेस सहित देश के कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी राजनैतिक दल गोरखपुर से भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ के बयानों को लेकर हायतौबा मचाए हुए हैं। आगे बढऩे से पहले इन बयानों पर नजर डालना बेहद आवश्यक है।
yaकहते हैं कि मुसलमानों की संख्या जहां भी 10 प्रतिशत से ज्यादा है, वहां दंगे होते हैं। जहां इनकी संख्या 35 फीसदी से ज्यादा है वहां गैर मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है। एक अन्य बयान में आदित्यनाथ कहते हैं कि अगर वह हममें से एक को मारेंगे तो यह उम्मीद रखना छोड़ दें कि वह सुरक्षित रहेंगे। अगर वह शांति से नहीं रहते हैं तो हम उन्हें सिखाएंगे कि शांति से कैसे रहा जाता है। हमले और धर्मान्तरण के मामले में हिन्दू समुदाय मुसलमानों को अब जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब देगा। संन्यासी के तौर पर मैं ऐसी असुर शक्तियों को दंडित कर सकता हूं। यदि मेरे एक हाथ में माला है तो दूसरे में भाला है।
लव जिहाद पर बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि लव जिहाद के जरिए देश को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का षड्यंत्र चल रहा है। उन्होंने कहा था कि अगर देश में आपको रहना है तो भारतीय संस्कृति और सभ्यता का सम्मान भी करना पड़ेगा। एक अन्य वीडियो में योगी आदित्यनाथ यह कहते दिखाई देते हैं अगर वो प्रेम जाल में फंसाकर एक हिन्दू लड़की का धर्म परिवर्तन कराते हैं तो हम उनकी सौ लड़कियों को हिन्दू बनाएंगे। योगी आदित्यनाथ ने जो कुछ कहा वास्तव में वह कितना सच है अथवा कितना गलत, कितना सांप्रदायिक है अथवा कितना धर्मनिरपेक्ष सवाल यह नहीं है। सवाल तो सबसे बड़ा यह है कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली कांग्रेस और समाजवादी जैसे राजनीतिक दलों के नेताओं के पेट में इससे मरोड़ क्यों उठ रही है? वे योगी के बयानों को उत्तरप्रदेश में होने वाले उपचुनावों से जोड़कर बवाल क्यों मचा रहे हैं?
जो लोग ऐसा कर रहे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या कांग्रेस ने कभी इस तरह के बयान नहीं दिए? क्या कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टीकरण के चलते देश के करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं को आहत नहीं किया? यहां हम कुछ ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करेंगे जिनसे यह सिद्ध होता है कि योगी आदित्यनाथ ऐसे बयान देने को क्यों मजबूर हुए। इतना ही नहीं इससे यह भी सिद्ध होता है कि कांग्रेस को योगी के बयान पर तनिक भी बवाल मचाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
सबसे पहला उदाहरण उस कांग्रेस नेता का है जिसने लगातार दस वर्षों तक इस देश के प्रधानमंत्री पद की कुर्सी संभाले रखी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने इस पद पर काबिज रहते एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि इस देश के सभी संसाधनों पर पहला हक इस देश के अल्पसंख्यकों अर्थात मुसलमानों का है। एक प्रधानमंत्री का यह तुष्टीकरण भरा बयान आखिर क्या इंगित करताहै?
बात यहीं समाप्त नहीं होती जरा याद करिए कांग्रेस के जयपुर अधिवेशन को यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हिन्दुओं पर जो निशाना साधा था वह कितना निदंनीय और घृणित था शिन्दे ने हिन्दुओं के लिए भगवा आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल करके कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया था।
यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह के मुस्लिम तुष्टीकरण और हिन्दू विरोधी मानसिकता का जिक्र करना भी प्रासंगिक होगा। दिग्विजय सिंह ने एक तरफ मुस्लिम तुष्टीकरण में बाटला हाउस एनकांउटर को फर्जी ठहराया था। और इसमें मारे गए आतंकवादियों के घर जाकर आंसू भी टपकाए थे। दिग्गीराजा के मुस्लिम प्रेम के  उदाहरण यहीं समाप्त नहीं होते पूरे देश ने टेलीविजन पर यह देखा है कि दिग्विजय सिंह ने ओसामा और हाफिज जैसे आतंकवादियों को किस प्रकार ‘जीÓ लगाकर आदर दिया था। कांग्रेस नेताओं के यह तो चंद किस्से ही हैं यदि पूरा इतिहास खंगाला जाए तो नेहरू से लेकर मनमोहन तक पूरी कांग्रेस अपने शासन काल में मुस्लिम वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए इस देश के मूल निवासी हिन्दुओं के साथ छल-कपट की राजनीति करती रही और हिन्दू तथा हिन्दुत्व के खिलाफ जहर उगलती रही। ऐसी कांग्रेस को यदि योगी आदित्यनाथ के बयान सांप्रदायिक नजर आ रहे हैं तो यह देखकर बेहद आश्चर्य होता है।
योगी आदित्यनाथ के जिस बयान पर कांग्रेसी सहित इस देश के तथा कथित धर्मनिरपेक्षता वादी सर्वाधिक विधवा विलाप कर रहे हैं उसमें योगी ने कहा कि जहां मुस्लिम आबादी बढ़ती है दंगे वहीं होते हैं?
डॉ.पीटर हैमण्ड की पुस्तक ”स्लेवरी टेररिज्य एण्ड इस्लाम-द हिस्टोरिकल रुट्स एण्ड कण्टेम्पररी थे्रट तथा लियोन यूरिस की पुस्तक ”द हज ÓÓका अध्ययन करने पर मुस्लिम जनसंख्या को लेकर किए गए अध्ययन पर चौकानें वाले तथ्य सामने आते हैं जिनसे योगी आदित्यनाथ के बयान में कही बात को बल मिलता है। इन पुस्तकों के मुताबिक जब तक किसी देश में अथवा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी 2 प्रतिशत के आसपास होती है, तब वे एकदम शांतिप्रिय कानून पसंद अल्पसंख्यक बनकर रहते हैं। जैसे कि अमेरिका में 0.6, आस्टे्रलिया में 1.5, कनाडा में 1.9, चीन में 1.8, इटली 1.5 तथा नार्वे में 1.8 प्रतिशत। जब मुस्लिम जनसंख्या 2 से 5 के बीच पहुंच जाती है तब वे अन्य धर्माविलंबियों में अपना धर्मप्रचार शुरू कर देते हैं, जिनमें अक्सर समाज का निचला तबका और अन्य धर्मों से असंतुष्ट हुए लोग होते हैं जैसे कि डेनमार्क में 2 प्रतिशत, जर्मनी में 3.7, ब्रिटेन में 2.1, स्पेन में 4 और थाइलैण्ड में 4.6 प्रतिशत।
मुस्लिम जनसंख्या के 5 प्रशित से ऊपर हो जाने पर वे अपने अनुपात के हिसाब से अन्य धर्माविलंबियों पर दबाव बढ़ाने लगते हैं और अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करने लगते हैं। उदाहरण के लिए वे सरकारों व शॉपिंग माल पर हलाल का मास रखने का दबाव बनाने लगते हैं। वे कहते हैं कि हलाल का मांस न खाने से उनकी धार्मिक मान्यताएं प्रभावित होती हैं। इस कदम से कई पश्चिम देशों में खाद्य वस्तुओं के बाजार में मुस्लिमों की तगड़ी पैठ बनी उन्होंने कई देशों के सुपर-मार्केट के मालिकों को दबाव डालकर हलाल का मांस रखने को बाध्य किया। दुकानदार भी धंधे को देखते हुए उनका कहा मान लेता है अधिक जनसंख्या का फैक्टर यहां से मजबूत होना शुरू हो जाता है। ऐसा जिन देशों में हो चुका वह हैं। फ्रांस जहां मुस्लिम 8 प्रतिशत, फिलीपीन्स 6 प्रतिशत, स्वीडन 5.5, स्विटजरलैण्ड 5.3, नीदरलैंड 5.8तथा त्रिनिदाद और टौबेगो 6 प्रतिशत।
इस बिन्दु पर आकर मुस्लिम सरकारों पर यह दबाव बनाने लगते हैं कि उन्हें उनके क्षेत्रों में शरीयत कानून के मुताबिक चलनेे दिया जाए। जब मुस्लिम जनसंख्या 10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो वे उस देश, प्रदेश, राज्य अथवा क्षेत्र विशेष में कानून व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा करना शुरू कर देते हैं। शिकायतें करना शुरू कर देते हैं। छोटी -छोटी बातों पर विवाद दंगे, तोडफ़ोड़ पर उतर आते हैं। चाहे वह फ्रांस के दंगे हों, डेनमार्क का कार्टून विवाद हो या फिर एस्टर्डम में कारों का जलाना हरेक विवाद को समझबूझ बातचीत से खत्म करने के बजाए और बढ़ाया जाता है। जैसे कि गुयाना में 10 प्रतिशत मुस्लिम, इसराइल में 16 प्रतिशत, केन्या में 11 प्रतिशत और रुस मुस्लिम आबादी 15 प्रतिशत के कारण हुआ।
जब मुस्लिम जनसंख्या 20 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है तब विभिन्न सैनिक शाखाएं जिहाद के नारे लगाने लगती हैं असष्णुता और धार्मिक हत्याओं का दौर शुरू हो जाता है। जैसे इथोपिया में 32 प्रतिशत भारत में 22 प्रतिशत।
मुस्लिम जनसंख्या के 40 प्रतिशत के ऊपर पहुंच जाने पर बड़ी संख्या में सामूहिक हत्याएं, आतंकवादी कार्रवाइयां चलने लगती हैं। जैसे बोस्निया में 40 प्रतिशत चांड में 54.2 प्रतिशत, लेबनान में 59 प्रतिशत। जब मुस्लिम जनसंख्या 60 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है तब अन्य धर्मावलंबियों का जातीय सफाया शुरू किया जाता है उदाहरण (भारत का कश्मीर)जबरिया मुस्लिम बनाना, अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल तोडऩा जजिया जैसा कोई अन्य कर वसूलना आदि किया जाता है जैसे अल्वानिया में 70 प्रतिशत, मलेशिया में 62 प्रतिशत कतर में 78 प्रतिशत और सूडान में 75 प्रतिशत। जनसंख्या के 80 प्रतिशत से ऊपर हो जाने के बाद सत्ता शासन प्रायोजित जातीय सफाई की जाती है। सभी प्रकार के हथकंडे अपनाकर जनसंख्या को 100 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाता है। जैसे बांग्लादेश 83 प्रतिशत, मिस्त्र 90 प्रतिशत, गाजा पट्टी 98 प्रतिशत, ईरान, ईराक, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, सीरीया आदि।
मुस्लिम जनसंख्या 100 प्रतिशत यानी कि दार-ए इस्लाम होने की स्थिति में वहां सिर्फ मदरसे होते हैं और सिर्फ कुरान पढ़ाई जाती है और इसे अंतिम सत्य माना जाता है। जैसे अफगानिस्तान, सउदी अरब, सोमालिया, यमन आदि।
यदि इन आंकड़ों को तथ्थों को सही मान लिया जाए तो भारत में मुस्लिम जनसंख्या 22 प्रतिशत हो जाने की स्थिति बेहद गंभीर कही जा सकती है। ऐसे हालात में योगी आदित्यनाथ के बयान पर हाय तौबा मचाने के बजाए इस स्थिति पर गंभीरता से विचार की जरुरत है। रही बात कांग्रेस की तो उसके लिए यही कहा जा सकता है रस्सी जल गई पर बल नहीं गए।

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योगी के देशराग पर कांग्रेस का विलाप क्यों? Exposing Congress’s Hypocrisy

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Yogi Adityanath’s statements: a wonderful article exposing Congress’s hypocrisy and pointing to imminent danger to India from Islam.

GIBV Congratualtes Shri Narendra Modi and Voters of India

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  Global Indians for Bharat Vikas

12 Pendleton Place, Edison, NJ 08820, USA http://www.gibv.org, <m2014.gibv@gmail.com>, 570-884-GIBV

India: Basement, Meera Manan Arcade, Parimal Garden, Amdavad-380006, 079-2640-7771

May 18, 2014

Global Indian for Bharat Vikas (GIBV) is very happy to congratulate Shri Narendra Modi on leading BJP and NDA a to unprecedented and historical victory in the recently concluded national elections of India.

This election has far reaching consequences for India and the world. After 30 long years, era of coalition politics has come to an end. A stable government where BJP has clear majority will be able to take critical decisions without succumbing to pressures from small regional parties with narrow interests. India has huge potential for development. It has rich natural resources and largest population of people under age 35. Shri Narendra Modi is capable of unleashing this potential and harnessing energy of the youth and employing it for all round progress.

Another salient point of this election is end of dynastic rule of Nehru-Gandhi family. Congress, led by this family forever has been reduced to a paltry 44 seats, failing the minimum threshold to qualify for leader of opposition in the Loksabha. Most of its ministers and seasoned members have lost spectacularly. Shri Modi had promised Congress Mukta Bharat and the process has begun. Congress has failed to win a single seat in seven states and has not been able to cross double digit in any state. Disintegration of Congress is now only a matter of time.

From BJP’s tally in UP and Bihar, it is clear that people have voted crossing barriers of caste and religion and in favor of development and stability. Decimation of BSP and SP in their bastion points to the beginning of the end of caste driven politics. As a matter of fact thousands of migrant workers and employees of major corporations in Gujarat who hail from UP, Bihar and Odisha and have experienced benefits of Gujarat model firsthand became brand ambassador for Shri Narendra Modi in their respective states.

Shri Narendra Modi deserves praise for conceiving, planning and executing a superb campaign using all the tools available, be it the social media or Chai Pe Charcha. He has led from the front and enthused millions of volunteers across the globe to work for a clear majority for BJP and a formidable tally for NDA. He has turned every obstacle, every insult thrown at him into a formidable weapon, be it Chaiwala or Jehar ki Kheti (poison farming) or Nichee jati (lower caste.)

Under Shri Narendra Modi’s leadership, we look forward to a time when India will lead the world, not as a superpower but as a cultural Guru, where age old and time tested ethos of Vasudhaiv Kutumbakam (The whole universe is a family) and Sarve Bhavantu Sukhinah (May all be happy) will lead to an era of cooperation instead of conflict and nations would compete to provide better living conditions to their citizens instead of stockpiling weapons in a game of one-upmanship.

Congratulations are also in order to the voters of India. They voted in big numbers. They voted judiciously and decisively. They voted for better future. This exhibits maturity of Indian electorate.

We at Global Indians for Bharat Vikas, a USA based international organization interested in the long term development of India with a Nationalist government at the helm are proud to have 1000+ volunteers across the globe who helped Shri Modi’s campaign in different ways. We will continue to help a government headed by Shri Narendra Modi by providing critical input on issues of importance to the nation.

We wish Narendrabhai Modi grand success as he sets out to tackle seemingly insurmountable problems of a weak economy, all pervading corruption, stagnant job market, instability, terrorism, etc. We feel proud that a giant of a Man , a visionary and a nationalist is going to be sworn in as the Prime Minister of India within a few days. Indeed, Better Days are Ahead.

Dr. Mahesh Mehta               Gaurang G. Vaishnav                       Anjlee Pandya

President                                 National Convener                           Secretary, India   operations

Boston., MA                             Edison, NJ                                     Amdavad, Gujarat

History in the Making- on the Campaign Trail, from USA to India- 9

May 6- Modiji’s rally in Gaurigunj- a memorable experience

As modiji’s rally was scheduled for May 6 in Amethi area, we decided to attend it rather than go campaigning as most villagers would be flocking to the rally. Time for rally was set for 3:00 PM and we knew that it would be past 4:00 PM before Modiji arrived.

We left from Kalyan Pur at 10:30 via Amethi as we had to buy train tickets for return to Varanasi. After the near death experience of driving long distances on the highways and byways of Varanasi to Amethi, we refused to go back by car and opted for the train instead. It was going to be a middle of the night train and reservation was not guaranteed. We bought the tickets any way for 3 AC train with our names on the waiting list. Traffic management in Amethi is very poor and no one follows any rule of the road so there were unnecessary and irritating long delays everywhere. There were virtual gridlocks in front of the cops, who stood by disinterested. Perhaps, they had imbibed attributes of a ‘sthitaprajna’ a bit too much!

Any way, finally we were on our way to Gaurigunj, which was about 10 miles northwest of Amethi. It took us 45 minutes because of bad roads. Our driver was expert at maneuvering landmines like potholes but that also meant that very often he came face to face, in a head-on like situation with the oncoming traffic. We saw scores of people walking to the venue, rickshaws, trucks and buses festooned with NaMo insignia; it was a festive atmosphere. We reached the venue at 1:45 PM, a good 75 minutes before the start time but there were already thousands of people. We were able to find seats on the side of the stage, in unreserved area in the 11th row from where one could clearly see the speaker as well as the giant screen. This was after standing for almost an hour.

Gajendrasingh Solanki, a well-known poet and an office-bearer of cultural wing of BJP was emceeing the event. He regaled the audience with his witty, full of barbs poetry castigating Congress. There were several speakers, mostly local and state level leaders, those who were past their prime in the political arena as well the new aspirants. Some were very good, others looked like a deer caught in the headlight of a car. In any case people were not paying attention; they were looking at a TV camera mounted on a crane and also at scores of reporters from every TV channel. Some were scanning the sky to see if they would be the first to spot Narendrabhai’s helicopter.

People kept pouring in. It was a God sent gift for hawkers and vendors. Heat was intense, around 110 degrees F. Water pouches, cool cucumber (literarily), sugarcane juice, fruits, soft drinks, snacks, were being hawked at inflated price and people were snapping them up like hot cake. Suddenly tons of youth invaded our area. Slowly they pushed their way to the front, dethroned those sitting in first row of chairs and started flinging chairs in the air to make room for them to stand. It was chaos for a while. Surprising there were no injuries but some chairs were broken. Some of these guys stood up on the chair, completely blocking view all those who were sitting. No amount of request or reasoning would work with them; they were simply there to have “darshan” of their God, NaMo. By the time Smruti Iraniji arrived at 4:00 PM, crowd had swelled to over 100,000. We had been sitting/standing in the scorching sun now for more than two hours. It was announced from the stage that there was 18-mile backup of traffic and vehicles were struggling to reach the rally. As the time drew closer for Modiji’s arrival, a slow hum that grew into a roar started from the audience. There were incessant chants of Modi, Modi and its variations. People would look up the sky, someone would mention that he had seen the helicopter and the crowd would be on its feet and in frenzy. One would think that Bhagwan Ramachandra himself was arriving in Pushpak viman! Ultimately just around 4:45 PM, a dot appeared in the sky, grew within moments to a full fledged helicopter, was almost in front of us, turned and landed just behind the stage. As Modiji came up on the stage, it was as if all hell broke loose; there was near pandemonium everywhere and for a while it looked like people would be crushed in the stampede. Eventually repeated request from the stage to maintain calm and dignity and security force’s quick action restored some semblance of order.

Smrutiji spoke first. She is a formidable orator and spoke well outlining her vision for Amethi. We could not see her as there were all these unruly youth standing on the chairs. She spoke for 20 minutes or so. By now crowd was estimated at 150,000. When Modiji rose to speak there was deafening slogan shouting. No one, including us could remain silent, such was the overpowering emotion. Modiji started off gently and as the time passed, he stepped up his attack on the misdeeds of the Gandhi family. He is so good at weaving his thoughts together that one would not know when he switches gears or subject. By now those rabble-rousers were gone. I surmised that they had no interest in Modiji’s speech (and probably his vision); they wanted to see him live from the close quarters, had their wish fulfilled and had left. So we were able to take their place, not standing on the chair but standing almost near the first row and could see Modiji clearly. Modiji heaped praises on Smrutiji. He tore into Priyanka Gandhi’s snide remark “Who is she (Smrutiji)?” He said, “I will tell you Priyankaji, who she is. She is my younger sister. I had given her the most underdeveloped district in Gujarat to work on and she has done such a wonderful job that I have sent her to Amethi so that people of Amethi can have development that your brother has neglected all these years.” He was so profuse in the praise of Smrutiji that she was seen crying and wiping tears. By now, Modiji had the crowd literarily eating out of his hands. He talked about all round development of Amethi that he has in mind; he talked about the woes of the farmers. It was clear that he knew all the local issues. As his speech neared the end, he talked about “politics of anger”, a phrase hurled at him by Rahul. He asked the audience I have a locked box (Hindi word: Pitera, Gujarati- Patara), should I open it for you? He asked this more than once and crowed roared in approval. Then he set out to list politics of anger starting with Rajeev Gandhi and ending with Rahul Gandhi. (1) Rajeev Gandhi who held just a party position got angry and had insulted publically the then C. M. of Andhra Pradesh who had come to receive him at the airport, driving him to tears. (2) Sonia Gandhi had elected president of Congress, Sitaram Kesari, a man in his eighties, who belonged to backward caste physically lifted from his office and then dumped out in the street so she could occupy Congress President’s chair. (3) When P. V. Nursing Rao, former Congress Prime Minister of Bharat died, Sonia Gandhi did not give permission to keep his body at the Congress office for people to pay homage (because after Lal Bahadur Shashtri, he was the first non-Nehru-Gandhi Congress PM) and she did not allow to have him cremated where all former PMs were, so that no memorial of him could be built later. (4) Rahul Gandhi, who talks about politics of anger, publically tore apart an ordinance passed by his own party’s government and insulted the Prime Minister, Manmohan Singh, who was traveling abroad.

With this stinging chrgesheet, he ended his address. It is to Narendra Modi’s credit that he has exposed the so-called Gandhi family ( we all know how Khan became Gandhi for political convenience and hoodwinking the nation) like no one else has, and he has taken the fight to their home ground.

We returned exhausted by the heat but exhilarated by the experience. Our excitement had not ended yet. That night we were waiting for the train to Varanasi at Amethi railway station. We were sitting next to a young man. As I started talking, I found out that the guy was a Youth Congress worker from Balia. He told me that he was in Amethi for two weeks to do survey for Rahul Gandhi. When I asked him about what he found, he bitterly said that people were asking questions about lack of basic amenities for which he and others had no answer. He said that the survey was an exercise in futility. He was a graduate without job. He surprised me when he said that his name was the electoral roll at two places, in Balia and in Bihar, across the boarder and that he intended to vote for BJP. He said only Modi could change the situation. Such was the Modi wave!

Last installment of our excitement was the train journey. The train arrived at 1:00 AM, half an hour late. We did not know where the 3AC coaches would come on the platform; we saw them but since the train stopped hardly for two minutes, we had to get into a non-ac compartment and stand in the vestibule. It was stuffy and hot. Someone told us that the train would stop for five minutes at Pratapgadh station (about half an hour away) where we could change to 3AC coach. As soon as train stopped at Pratapgadh, we got down with our luggage and literarily ran to find 3AC coaches. There were many but we did not see the train conductor who could verify if we had moved from the waiting list to confirmed reservation. So again, as the train started, we entered nearest 3AC compartment. We sat in the walkway/aisle on our bags and kept dozing off. Of course, we had to get up a number of times when passengers had to pass by to got to the bathroom. No one came to check our tickets and we were glad when the train arrived at Varanasi at 5:30 AM. We were on the road for campaigning by 9:00 AM but that is the story for another day.

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