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Syrian Crisis Explained (!)

From WhatsApp

If in case it was all too confusing for you, here’s a summary:

President Assad (who is bad) is a nasty guy who got so nasty his people rebelled and the Rebels (who are good) started winning (hurrah!).

But then some of the rebels turned a bit nasty and are now called Islamic State (who are definitely bad!) while some continued to support democracy (who are still good.)

So the Americans (who are good ) started bombing Islamic State (who are bad ) and giving arms to the Syrian Rebels (who are good ) so they could fight Assad (who is still bad) which was good.

There is a breakaway state in the north run by the Kurds who want to fight IS (which is good) but the Turkish authorities think they are bad, so the U.S. says they are bad while secretly thinking they’re good and giving them guns to fight IS (which is good) but that is another matter.

Getting back to Syria.

So President Putin (who is bad because he invaded Crimea and the Ukraine and killed lots of folks, including that nice Russian man in London with polonium poisoned sushi, has decided to back Assad (who is still bad) by attacking IS (who are also bad ) which is sort of a good thing (!?).

But Putin (still bad) thinks the Syrian Rebels (who are good) are also bad, and so he bombs them too, much to the annoyance of the Americans (who are good) who are busy backing and arming the rebels (who are also good).

Now Iran (who used to be bad, but now they have agreed not to build any nuclear weapons with which to bomb Israel are now good) are going to provide ground troops to support Assad (still bad) as are the Russians (bad) who now have ground troops and aircraft in Syria.

So a Coalition of Assad (still bad) Putin (extra bad) and the Iranians (good, but in a bad sort of way) are going to attack IS (who are bad which is good, but also the Syrian Rebels (who are good) which is bad.

Now the British (obviously good, except that silly anti-Semite who leads the Labor Party, Mr. Corbyn in the corduroy jacket, who is bad) and the Americans (also good) cannot attack Assad (still bad) for fear of upsetting Putin (bad) and Iran (good/bad) and now they have to accept that Assad might not be that bad after all compared to IS (super bad — see Paris, November 2015).

So Assad (bad) is now probably good, being better than IS and, because Putin and Iran are also fighting IS, that may now make them good. America (still good) will find it hard to arm a group of rebels being attacked by the Russians for fear of upsetting Mr. Putin (now good) and that nice mad Ayatollah in Iran (also good?) and so they may be forced to say that the Rebels are now bad, or at the very least abandon them to their fate. This will lead most of them to flee to Turkey and on to Europe or join IS (still the only consistently bad).

To Sunni Muslims an attack by Shia Muslims (Assad and Iran) backed by Russians will be seen as something of a Holy War. Therefore, the ranks of IS will now be seen by the Sunnis as the only Jihadis fighting in the Holy War and hence many Muslims will now see IS as good (duh).

Sunni Muslims will also see the lack of action by Britain and America in support of their Sunni rebel brothers as something of a betrayal (might have a point?) and hence we will be seen as bad.

So now we have America (now bad) and Britain (also bad) providing limited support to Sunni Rebels (bad ) many of whom are looking to IS (good/bad ) for support against Assad (now good) who, along with Iran (also good) and Putin (now, straining credulity, good ) are attempting to retake the country Assad used to run before all this started.

Got it?

Game Plan- Create Dissention in each Group that Voted for Modi

From WahtsApp by Pankaj Ojha

मई 2014
मोदीजी pm बन गए
रिपोर्ट आई की
इस बार मोदी को
एक तरफ़ा वोट मिला
1) नोजवानों से ,
खासकर कॉलेज छात्रों से
2) कमजोर तबकों से,
खासकर दलितों से
3) हिन्दू समाज से,
खासकर मध्यम वर्ग से
4) गुजराती लोगों से,
खासकर पटेलों से
5) मुस्लिम समाज से,
खासकर गरीब मुस्लिम से
6) महिलाओं से,
खासकर धर्मप्रेमी महिलाओं से
7) व्यापारी वर्ग से,
ख़ासकर छोटे मझोले वर्ग से
8) देश के थिंकटैंक से,
खासकर बुद्धिजीवी वर्ग से
ऐसे कई कई वर्गों ने अपनी
पुश्तैनी राजनीतिक निष्ठां
को दरकिनार कर मोदी को
वोट दिया। कश्मीर से
कन्याकुमारी तक यही देखने में
आया।
हर राजनीतिक दल इसे महसूस कर
पाया,
पुरे भारतवर्ष में।
इसका तोड़ निकाला गया।
नतीजा आज आपके सामने है।
हर उस वर्ग को सबसे पहले
चिन्हित किया गया जिसने
मोदी को एक तरफ़ा वोट
दिया। फिर उस वर्ग की
“दुखती नस” मार्क की गई और
खेल शुरू हुआ।
बेहद सटीक और बारीकी से
चुन चुन कर इन वर्गों को टारगेट
करना शुरू हुआ।
किरदार लिखे गए और
हर वर्ग को एक टार्गेटेड
किरदार दिया गया।
उसकी टाईमिंग तय की गई।
और अपने हाथ में रिमोट रखा
प्रमुख विपक्षी दल ने ।
भांड मीडिया इसमें अहम रोल
अदा करने वाला था।
मकसद इन सबका एक था-
हर वर्ग को तोडना,
हर वर्ग को जहर से भरना,
हर वर्ग को छिन्न भिन्न करकें
रखना ,
ताकि फिर वो भविष्य में,
कभी एक होकर,
मोदी को वोट ना दे
अब आप खुद इस बड़े से खेल को
समझिये,
इनकी परफेक्ट टाइमिंग को
समझिये,
इनके वेल प्लेसड किरदारों को
देखिये,
बेहद खूबसूरत स्क्रिप्ट को
पढ़िए। हर बयान की एक परफेक्ट
टाइमिंग
स्पष्ट रखी दिखेगी।
1) नोजवानों के लिए
JNU वाला उमर खालिद
किरदार
2) दलित वर्ग के लिए
रोहित वेमुला वाला किरदार
3) हिन्दू वर्ग के लिए
फ़िल्मी खान वाला किरदार
4) गुजरती पटेलों के लिए
हार्दिक पटेल वाला किरदार
5) मुस्लिमो के लिए
अख़लाक़ वाला किरदार
6) महिलाओं के लिए
शनि शिंगापुनकर वाली
किरदार
7) व्यापारी वर्ग के लिए
GST वाला किरदार
8) बुद्धिजीवी वर्ग के लिए
असहिष्णडू वाला किरदार
मजे और आश्चर्य की बात यह की
इसमें नया कुछ भी नही है। वर्षो
से समाज में चली आ रही
बुराइयों को ही आधार बनाया
गया है।
सिर्फ मोहरे बदल कर
नए वो किरदार लाये गए हैं
जो जवान है
जोश से भरपूर हैं।
ये तो बानगी है उन किरदारों
की अब तक सामने आ गए हैं।
भविष्य में और भी सामने आएंगे ,
अपनी परफेक्ट
स्क्रिप्ट और टाइमिंग के साथ।
आपको ,
हमको ,
हिंदुस्तान,
को तोड़ने की साजिश के साथ।
सजग रहिएगा
होश से काम लीजिएगा
अपने विवेक को
मरने न दीजियेगा
अपनी एकता बनाये रखना
किसी भी उकसावे में न फँसना
हम “अनेक” थे
हम “अनेक” हैं
हम “अनेक” ही रहेंगे
अपनी इसी
“अनेकता में एकता”
में हमारी ताकत और
सुनहरा भविष्य निहित है
हमारी सोच और कल्पना से भी
आगे/बड़े ,
इस गेमप्लान की हवा को,
सिर्फ हमारी
शालीन ,गरिमापूर्ण,
मजबूत एकता से ही निकला जा
सकता है।
धीरज संयम रखकर,
मोदीजी को आपका और आपके
बच्चों का
सुनहरा भविष्य बनाने का
मौका दीजिये
क्योंकि वे अब तक की हर
अग्निपरीक्षा में सफल हुए हैं

My comments: BEWARE of the Wolves. Stay United. 2019 battle has already started. Take this message to every home and also to BJP leaders in your area.

An Open Letter to Rahul Gandhi

Source Unknown. WhatsApp by Hiren Megha

🙏कोई पहुंचा दो मेरा ये ख़त 🙏
प्रति,
राहुल गांधी
सांसद/ महासचिव
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

राहुल जी, आज आप का #JNU में दिया भाषण सुना और मजबूर हुआ ये पत्र लिखने को।आज आपने महज दो हजार छात्रो के सामने ही भाषण नहीं दिया बल्कि आपने छात्र के लिबास में वहां घूम रहे राष्ट्र विरोधी ताकतों को भी सम्बल प्रदान कर दिया कि हिंदुस्तान मुर्दाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने पर उस राजनैतिक दल को कोई आपत्ति नहीं है जिसने आजादी के बाद 60 सालो तक इस देश की कमान संभाली है और भविष्य में भी इस देश की कमान सँभालने को अपना स्वाभाविक हक़ मानती है।

राहुल,आपने #JNU में कहा कि छात्रो की आवाज दबाने वाला सबसे बड़ा राष्ट्रद्रोही है। आपका मतलब हिंदुस्तान की न्यायपालिका ने आप की ही सरकार के दौरान जिस आतंकवादी अफजल गुरु को फाँसी दी थी उसको नाजायज मान कर उसे शहीद का दर्जा देने वाले राष्ट्रद्रोही पर अगर सरकार कार्यवाही करती है तो क्या वो सरकार राष्ट्रद्रोही सरकार है।

#Rahulgandhi जी आप ने कहा कि युवा अपनी बात कहते है तो सरकार उन्हें देशद्रोही कहती है। आप का मतलब है कि “कितने अफजल तुम मारोगो-हर घर से अफजल निकलेगा” के नारे लगाने वाले और… “हमको चाहिए आजादी” के नारे लगाने वालो को सरकार ताम्रपत्र से सम्मानित करना था ?

रोलिंस कालेज से स्नातक और केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से मिली एम्फिल की डिग्री आप को किस पढाई पर मिली मैं ये नही जानता पर इतना जरूर लगता है कि आज का आप का भाषण न आपकी दादी स्व.इंदिरा गांधी को पसंद आया होगा और न आप के पिता स्व.राजीव गांधी को।उन्हें भी आज शायद यही लगा होगा की उन्हें आप को हिंदुस्तान के किसी सरकारी स्कूल में पढ़ाना था जहाँ और कुछ पढ़ाया जाय या न पढ़ाया जाय… राष्ट्रभक्ति के भाव और उसका प्रकटीकरण जरूर सिखाया जाता है।

आप मेरी इस समीक्षा को मेरे भाजपाई होंने से जोड़ कर प्लीज ख़ारिज मत कीजियेगा। हाँ मैं हूँ भाजपाई….#BJP …। पर भाजपाई होने से पहले एक हिंदुस्तानी हूँ और आप ने आज मेरे जैसे करोडो हिन्दुस्तानियो का दिल दुखाया है।हिंदुस्तान को गाली और पाकिस्तान के लिए दुआ मांगने वालो के साथ आप का खड़ा होना वाकई एक सच्चा हिंदुस्तानी होने की वजह से शर्म से आज मेरा सर झुक गया।

आज आपके एक भाषण ने वो कर दिया जो पाकिस्तान की पूरी आईएसआई और सैकड़ो हाफिज सईद नहीं कर पाये…। वो है हम हिंदुस्तानियो का मनोबल तोड़ना…देश के सैनिको के मन में इस प्रश्न को पैदा करना कि वो अपनी जान की बाजी किसके लिए और क्यों लगा रहे है..?

मैंने सीताराम येचुरी को कोई पत्र नहीं लिखा क्यों कि वो वही कह रहे है जिसकी मुझे उनसे उम्मीद थी…पर आप से इस भाषण की उम्मीद नहीं थी मुझे।#sitaramyechury

राहुल जी..आप नरेंद्र मोदी से नफरत कीजिये वो आप का हक़ है पर..देश से आप प्यार करेंगे ये तो उम्मीद हम रख सकते है न…..आप भारतीय जनता पार्टी को खूब भला बुरा बोलिये…वो भी आप का हक़ है मगर…राहुल जी… देश को भला बुरा बोलने वालो के साथ आप नहीं खड़े होंगे ये उम्मीद तो हम रख ही सकते है न…फिर क्यों…आखिर क्यों..??

राहुल जी #JNU मामले में आप दो दिन चुप रहे तो लगा कि आप भी भारत जिंदाबाद करने वालो के साथ है…मगर जब आपने बोला तो अफसोस… आपने देश को आतंकवाद के मामले में दो भाग में बाँट दिया…।

भारत की विश्व भर में आतंकवाद के मुद्दे पर छेड़ी गई लड़ाई को घरेलू मोर्चे पर ही आपने कमजोर कर दिया।

जरा सोच के देखियेगा कि आप के एक भाषण ने कश्मीर मुद्दे पर भारत को कितनी क्षति पहुचाई है ?

इशरत जहाँ आतंकवादी थी ये हेडली की गवाही से एक बार फिर साबित हुआ है। अब आप अपनी और अपनी पार्टी के पिछले बयानों और क्रियाकलापो पर चिंतन कीजिए। नफरत के हद तक मोदी विरोध की तीब्र इच्छा और प्रयास ने आप को देश द्रोहियो के कवच-कुंडल की तरह तो नहीं खड़ा कर दिया है…? चिंतन कीजिये

मुझे आप की राष्ट्रभक्ति पे प्रश्नचिन्ह लगाने का कोई हक़ नहीं है और न मैं कोई प्रश्नचिन्ह लगा रहा हूँ…। मुझे आपकी राष्ट्रभक्ति के प्रकटीकरण के उस तरीके पर एतराज है जो दुश्मनो का मनोबल बढाये और राष्ट्रभक्तो का मनोबल तोड़े। ये तब भी होता है जब देश का प्रधानमंत्री विश्व मंच पर आतंकवाद के खात्मे का नारा दे कर पूरे विश्व को एक करता है और उसके घर लौटने से पहले आप उसकी छिछालेदर में जुट जाते है।

दिग्विजय सिंह की क्लास में जहाँ आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को “ओसामा जी” कह कर बुलाने की शिक्षा दी जाए वो क्लास ठीक नहीं है।

राहुल जी अभी एक न्यूज़ चॅनल ने दिल्ली में सर्वे कराया जिसमे उसने आप की लोकप्रियता सात प्रतिशत बताई।मुझे लगता है कि यह आंकड़ा दिल्ली में आपकी पार्टी को मिलने वाले व्होट प्रतिशत से भी बेहद कम है।आप और आपकी पार्टी ने इस सर्वे को नकारा नहीं है। तो अगर ये सर्वे सही है तो भाजपाई हो कर भी मेरी सलाह है कि आप अपने काम करने का बाकी तरीका बदले या न बदले मगर अपनी राष्ट्रभक्ति के प्रस्तुतिकरण के तरीके पर आत्मचिंतन अवश्य कीजिये।क्यों कि अगर आपके इस प्रगटीकरण और भाषण से हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी पाकिस्तान में बैठ कर खुश हो रहे है तो कही न कही कुछ गड़बड़ जरूर है…।

और कुछ नहीं तो अपने भाषण लिखने वाले को तो आज ही बदल डालिये.. प्लीज ….

भवदीय
एक राष्ट्रभक्त

मैं नहीं भूला- I have not forgotten

I am reproducing an email I received (I have added the pictures.) While I am not in the business of wholesale condemnation of a community, when I look at current day ISIS, Taliban, al Qaeda and similar other outfits and look at the terror unleashed by Turks, Lodis, Mughals, etc. on the Hindus and search for common links for their inhumane, atrocious barbarism, I am compelled to come to conclusion that the common link that binds  “rakshasas”  of 8th to 17th century with 21st century ones is nothing but Islam.

We have heard the stale argument that no religion teaches violence, that Islam is not to be blamed, these are misguided followers, etc. But the questions that beg answers are, why doesn’t Islam have a self-correcting feature?  Why do Muslims by and large keep mum in face of such cruelty?  Isn’t keeping silent a tacit approval?  There are enough “aayats” in Quran advocating violence and subterfuge, so I am not even going into that.

Point is, should the Hindus live in the utopia of Hindu-Muslim bhai bhai and close their eyes to the reality? Should Hindus look at every Muslim with suspicion? Should those Muslims who don’t agree with ways and means of ISIS, Taliban and the al Qaeda continue to keep quiet?

मैं नहीं भूला

अत्याचार जो मुगलों, चंगेजों, तुर्कों आदि ने हमारे हिंदू पूर्वजो पर किये
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1- मैं नहीं भूला उस कामपिपासु अलाउद्दिन को, जिससे अपने सतित्तव को बचाने के लिये रानी पद्ममिनी ने 14000 स्त्रियो के साथ जलते हुए अग्निकुंड में कूद गयी थीं।
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2- मैं नहीं भूला उस जालिम औरंगजेब को, जिसने संभाजी महाराज को इस्लाम स्वीकारने से मना करने पर तडपा तडपा कर मारा था।
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3- मैं नहीं भूला उस जिहादी टीपु सुल्तान को, जिसने एक एक दिन में लाखो हिंदुओ का नरसंहार किया था।
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4- मैं नहीं भूला उस जल्लाद शाहजहाँ को, जिसने 14 बर्ष की एक ब्राह्मण बालिका के साथ अपने महल में जबरन बलात्कार किया था।
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5- मैं नहीं भूला उस बर्बर बाबर को, जिसने मेरे श्री राम प्रभु का मंदिर तोडा और लाखों निर्दोष हिंदुओ का कत्ल किया था।
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6- मैं नहीं भूला उस शैतान सिकन्दर लोदी को, जिसने नगरकोट के ज्वालामुखि मंदिर की माँ दुर्गा की मूर्ति के टुकडे कर उन्हे कसाइयो को मांस तोलने के लिये दे दिया था।
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7- मैं नहीं भूला उस धूर्त ख्वाजा मोइन्निद्दिन चिस्ती को, जिसने संयोगीता को इस्लाम कबूल ना करने पर नग्न कर मुगल सैनिको के सामने फेंक दिया था।
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8- मैं नहीं भूला उस निर्दयी बजीर खान को, जिसने गुरूगोविंद सिंह के दोनो मासूम फतेहसिंग और जोरावार को मात्र 7 साल और 5 बर्ष की उम्र में इस्लाम ना मानने पर दीवार में जिन्दा चुनवा दिया था।
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Guru Givind Singh's sons bricked alive
9- मैं नहीं भूला उस जिहादी बजीर खान को, जिसने बन्दा बैरागी की चमडी को गर्म लोहे की सलाखो से तब तक जलाया जब तक उसकी हड्डियां ना दिखने लगी मगर उस बन्दा वैरागी ने इस्लाम स्वीकार नही किया
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10- मैं नहीं भूला उस कसाई औरंगजेब को, जिसने पहले संभाजी महाराज की आँखों मे गरम लोहे के सलिए घुसाए, बाद मे उन्हीं गरम सलियों से पुरे शरीर की चमडी उधेडी, फिर भी
संभाजी ने हिंदू धर्म नही छोड़ा था।
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11- मैं नहीं भूला उस नापाक अकबर को, जिसने हेमू के 72 वर्षीय स्वाभिमानी बुजुर्ग पिता के इस्लाम कबूल ना करने पर उसके सिर को धड़ से अलग करवा दिया था।
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12- मैं नहीं भूला उस वहशी दरिंदे औरंगजेब को, जिसने धर्मवीर भाई मतिदास के इस्लाम कबूल न करने पर बीच चौराहे पर आरे से चिरवा दिया था।
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Sawing alive Bhai MatidasBhaiDyal Das's martydom
Mughal Torture of Hindus and Shikhs
हम हिंदुओ पर हुए अत्याचारो को बताने के लिए शब्द और पन्ने कम हैं…. 

The Moslem Conquest of India- Extract from Will & Ariel Durant’s book

Those who do not learn from history are bound to repeat it.

This is the secret of the political history of modern India. Weakened by division, it succumbed to invaders; impoverished by invaders, it lost all power of resistance, and took refuge in supernatural consolations; it argued that both mastery and slavery were superficial delusions, and concluded that freedom of the body or the nation was hardly worth defending in so brief a life. The bitter lesson that may be drawn from this tragedy is that eternal vigilance is the price of civilization. A nation must love peace, but keep its powder dry.

This is an extract from: The Moslem Conquest of India, Volume 1, Chapter 16

The Story of Civilization Our oriental Heritage by Will & Ariel Durant: 

Tuktuki Mandal released? Really?

The following email exchange is self-evident. While Satyanarayana Dosapati is an avid Hindu activist outside of Bharat, Sri Tapan Ghosh is a well-known Hindu leader from West Bengal who has been fighting Islamic terrorism in his state singlehandedly for years with great danger to his own life.  Please share this with your friends and acquaintances and post on your social media.

Thank you,

Gaurang Vaishnav

from:   narayanasd123@gmail.com

to:

date:    Tue, Jul 21, 2015 at 3:10 AM

subject:            Tuktuki Mandal released? What next steps?

There are some questions raised now that Tuktuki is under Police custody, what is there to rally about?   Tuktuki case has made progress because people across the world rallied together for a single daughter.   The  situation in West Bengal is so severely grim, there are issues to rally about in every aspect.    We are facing a very dangerous situation, a question of survival of millions.

On one side per UN report 28,000 girls per year abducted, just few days ago another girl Diya Tamang from Siliguri (given below) was abducted.  Per NDTV report, in Sandeshakali area girls are bought and sold every day.    There is a major cleansing of Hindus across 32,000 villages of West Bengal where there are riots almost every day where Hindus are systematically cleansed (see report with pictures given below).

The  program of planned Ethnic Cleansing using riots, murders, rape and human trafficking will not go away easily.   A leading BJP person whom I spoke just few days ago said, it is not a Pakistan in the making, it is already a Pakistan.   Let us hope the positive effect of rallies in USA will be taken to next step with rallies in UK which has a very strong Hindu community that will not lie down and take this.

Here is what Tappan ji said on Tuktuki release that we should take note of.  

———- Forwarded message ———-
From: Tapan Ghosh <tapanghosh6@gmail.com>
Date: Tue, Jul 21, 2015 at 2:38 AM
Subject: Re: Abducted Tuktuki Rescued by WB Police after 75 days under increa…
To:  :

I am astonished seeing the naivete of the people.  If Tuktuki went on her own, why she would return on her own?

She was under full control of the abductors, fully hand in glove with local police, for long 75 days. What have happened to her – is it difficult to guess? She might have been raped 50 times. More often than not, more than once a day. May be by a number of people. By this time she may be pregnant. She might have been compelled to do abortion.

Are these not enough to break her moral courage?????????? (of a 14 year old minor girl!)

Moreover,  She has been repeatedly told that now no Hindu boy will marry her. She will not only be burden to her parents, but no Hindu boy will marry even her sister if she returns home. If her parents accept her, then her family will be boycotted by the Hindu society.

They also threatened her that they would murder her father and brother, and they will lift her little sister too. Tuktuki knows since her childhood how much powerful the Muslims are! Moreover, her kidnapper Babusona Gazi’s father is clerk of unchallenged dawn of the area named Salim. Also Tuktuki saw the dozens and dozens of fire arms (illegal) in their possession during her detention period. Hence, Tuktuki thinks that the threatenings are real.

I have dealt at least 50 cases like this. In this situation the little immature girl thinks, “My life has already been ruined. Now I should not be responsible for ruining my entire family. Let my parents live in peace. I should not be problem for the future life of my brother, sister and other relatives. FOR ALL THESE, I SHOULD SACRIFICE MY LIFE & FUTURE.”

So, the girl surrenders to the tremendous pressure of the culprits and police.  Don’t you think it is possible?

Hence, what we have to do? Plz remember the fact – the abducted girl doesn’t know me or Hindu Samhati. The hapless girl doesn’t know that her father is now getting help from some powerful people or organisation after her abduction. She knows – Babusona-s and Salim-s are extremely powerful and her parents are very poor illiterate weak.

In this position, the girl obeys all instructions given to her by the abductors and the culprit police. Hence she gives statement in the court of law as per their wish. AND YOU PEOPLE START SHOUTING – OH! I SAID SO BEFORE! THAT THE GIRL HAS ELOPED WITH THE MUSLIM BOY.

SORRY FRIEND, I DIFFER WITH YOU.

YOU PLZ KEEP IN MIND THE BOTTOM LINE – IN THIS MOGRAHAT AREA (BLOCK) HINDUS ARE 40%, MUSLIMS ARE 60%. HAVE YOU EVER LIVED IN SUCH AN AREA??

I fought and fighting dozens & dozens of case like this. I am not upset. I am not frustrated. I am very much accustomed with all these. I fight till last. I will fight till last in this Tuktuki’s case too.

I can only request you to try to know the ground realities and try to understand the difficult condition of the Hindus living in a Muslim majority area. And then deliver your judgement.

Regards to all.

Tapan Ghosh

Hindu Samhati

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Here is one person wrote on Facebook where things go:

———- Forwarded message ———-
From: Souptik Mukherjee <souptikm@gmail.com>
Date: 2015-07-21 1:24 GMT-04:00
Subject: Tuktuki furture, as MP candidate for 2014, Abhijit Das or Bobby Das sees it
To:

https://www.facebook.com/abhijit.bobby

সত্যি বলতে কি, টুকটুকির ঘটনা আমার কাছে খুব একটা আশ্চর্যজনক নয়, কারন এই ঘটনা প্রায়ই ঘটছে দঃ ২৪ পরগনায়। সেগুলি নিউজে আসেনা। আমার কাছেই প্রতিমাসে ৬-৭ টা এই ধরনের ঘটনা আসে। তাই এইসব দেখে ও লড়াই করতে করতে আমি ক্লান্ত।

কারন আমি জানি এরপর কি হবে।কালের গতিতে টুকটুকি কাহিনি ,আর সব মেয়েগুলির মতই্‌ ,চাপা পরে যাবে। তার ঠাই হবে হোমে. হোমে গিয়ে বাবুসোনা গাজির লোকজন ঘুষ দিয়ে টুকটুকির সাথে দেখা করবে ,আর তারপর ১৮ বছর হলেই , চলে যাবে মোল্লাদের ঘরেই ,কারন এইকদিনেই সে পেয়েছে শারীরিক সুখ একি সাথে তাকে গ্রাস করবে এই আতঙ্ক” আমাকে কোন হিন্দু ছেলেরা তো বিয়ে করবেনা । তার থেকে ভাগ্য যেখানে নিয়ে যাচ্ছে সেখানেই যাই ।” তার বাবা- মায়ের কিছুই করার থাকবে না। আর তখন অনেকের কাছেই টুকটুকি কাহিনী মনে হবে LOST GAME !

[English Translation]

In fact, I am not amazed by Tuktuki events, because these events often occur in South 24 Paraganas . Media do not cover them. These events come to me each month 6-7  at least. So seeing  these things often, I am tired of fighting.

Because I know what will happen next, like all stories it will be buried later. She will get her place in the correctional home and Babusona Ghazi’s men will bribe the guards to visit Tuktuki. And then when she is 18 years, she would leave to settle with Babusona Ghazi, because her rapist  would present himself as her lover and she would have at the back of her mind that no Hindu boy will marry me. So if  Its where the fate is leading me then let’s go there. Her dad and mom will stand helpless then. And for many people  Tuktuki story will feel like LOST GAME!

Hard copy: योगी के देशराग पर कांग्रेस का विलाप क्यों? Exposing Congress’s Hypocrisy

Some readers could not open the link that was given for this article in a previous post, hence I reproduce it here in full.

प्रवीण दुबे
स्‍वदेश के समाचार संपादक प्रवीण जी गत १८ वर्षों से समसामयिक विषयों पर लेखनरत हैं।

प्रवीण दुबे
”सूप बोले सो बोले छलनी क्या बोले जिसमें बहात्तर छेद देश की सबसे पुरानी और सर्वाधिक समय तक सत्तासीन रहने वाली कांग्रेस और उसकी कुछ पिछलग्गू पार्टियां धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिकता, अल्पसंख्यक संरक्षण जैसे विषयों पर कुछ बोलती हैं तो सहसा ही ऊपर लिखी कहावत याद आ जाती है। वास्तव में कांग्रेस ने आजादी के पहले और आजादी के बाद इन विषयों को लेकर जो चरित्र प्रस्तुत किया क्या उसके चलते उसे इन विषयों पर किसी से भी कुछ भी कहने का अधिकार है?
वर्तमान की बात करें तो कांग्रेस सहित देश के कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी राजनैतिक दल गोरखपुर से भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ के बयानों को लेकर हायतौबा मचाए हुए हैं। आगे बढऩे से पहले इन बयानों पर नजर डालना बेहद आवश्यक है।
yaकहते हैं कि मुसलमानों की संख्या जहां भी 10 प्रतिशत से ज्यादा है, वहां दंगे होते हैं। जहां इनकी संख्या 35 फीसदी से ज्यादा है वहां गैर मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है। एक अन्य बयान में आदित्यनाथ कहते हैं कि अगर वह हममें से एक को मारेंगे तो यह उम्मीद रखना छोड़ दें कि वह सुरक्षित रहेंगे। अगर वह शांति से नहीं रहते हैं तो हम उन्हें सिखाएंगे कि शांति से कैसे रहा जाता है। हमले और धर्मान्तरण के मामले में हिन्दू समुदाय मुसलमानों को अब जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब देगा। संन्यासी के तौर पर मैं ऐसी असुर शक्तियों को दंडित कर सकता हूं। यदि मेरे एक हाथ में माला है तो दूसरे में भाला है।
लव जिहाद पर बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि लव जिहाद के जरिए देश को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का षड्यंत्र चल रहा है। उन्होंने कहा था कि अगर देश में आपको रहना है तो भारतीय संस्कृति और सभ्यता का सम्मान भी करना पड़ेगा। एक अन्य वीडियो में योगी आदित्यनाथ यह कहते दिखाई देते हैं अगर वो प्रेम जाल में फंसाकर एक हिन्दू लड़की का धर्म परिवर्तन कराते हैं तो हम उनकी सौ लड़कियों को हिन्दू बनाएंगे। योगी आदित्यनाथ ने जो कुछ कहा वास्तव में वह कितना सच है अथवा कितना गलत, कितना सांप्रदायिक है अथवा कितना धर्मनिरपेक्ष सवाल यह नहीं है। सवाल तो सबसे बड़ा यह है कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली कांग्रेस और समाजवादी जैसे राजनीतिक दलों के नेताओं के पेट में इससे मरोड़ क्यों उठ रही है? वे योगी के बयानों को उत्तरप्रदेश में होने वाले उपचुनावों से जोड़कर बवाल क्यों मचा रहे हैं?
जो लोग ऐसा कर रहे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या कांग्रेस ने कभी इस तरह के बयान नहीं दिए? क्या कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टीकरण के चलते देश के करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं को आहत नहीं किया? यहां हम कुछ ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करेंगे जिनसे यह सिद्ध होता है कि योगी आदित्यनाथ ऐसे बयान देने को क्यों मजबूर हुए। इतना ही नहीं इससे यह भी सिद्ध होता है कि कांग्रेस को योगी के बयान पर तनिक भी बवाल मचाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
सबसे पहला उदाहरण उस कांग्रेस नेता का है जिसने लगातार दस वर्षों तक इस देश के प्रधानमंत्री पद की कुर्सी संभाले रखी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने इस पद पर काबिज रहते एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि इस देश के सभी संसाधनों पर पहला हक इस देश के अल्पसंख्यकों अर्थात मुसलमानों का है। एक प्रधानमंत्री का यह तुष्टीकरण भरा बयान आखिर क्या इंगित करताहै?
बात यहीं समाप्त नहीं होती जरा याद करिए कांग्रेस के जयपुर अधिवेशन को यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हिन्दुओं पर जो निशाना साधा था वह कितना निदंनीय और घृणित था शिन्दे ने हिन्दुओं के लिए भगवा आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल करके कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया था।
यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता और पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह के मुस्लिम तुष्टीकरण और हिन्दू विरोधी मानसिकता का जिक्र करना भी प्रासंगिक होगा। दिग्विजय सिंह ने एक तरफ मुस्लिम तुष्टीकरण में बाटला हाउस एनकांउटर को फर्जी ठहराया था। और इसमें मारे गए आतंकवादियों के घर जाकर आंसू भी टपकाए थे। दिग्गीराजा के मुस्लिम प्रेम के  उदाहरण यहीं समाप्त नहीं होते पूरे देश ने टेलीविजन पर यह देखा है कि दिग्विजय सिंह ने ओसामा और हाफिज जैसे आतंकवादियों को किस प्रकार ‘जीÓ लगाकर आदर दिया था। कांग्रेस नेताओं के यह तो चंद किस्से ही हैं यदि पूरा इतिहास खंगाला जाए तो नेहरू से लेकर मनमोहन तक पूरी कांग्रेस अपने शासन काल में मुस्लिम वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए इस देश के मूल निवासी हिन्दुओं के साथ छल-कपट की राजनीति करती रही और हिन्दू तथा हिन्दुत्व के खिलाफ जहर उगलती रही। ऐसी कांग्रेस को यदि योगी आदित्यनाथ के बयान सांप्रदायिक नजर आ रहे हैं तो यह देखकर बेहद आश्चर्य होता है।
योगी आदित्यनाथ के जिस बयान पर कांग्रेसी सहित इस देश के तथा कथित धर्मनिरपेक्षता वादी सर्वाधिक विधवा विलाप कर रहे हैं उसमें योगी ने कहा कि जहां मुस्लिम आबादी बढ़ती है दंगे वहीं होते हैं?
डॉ.पीटर हैमण्ड की पुस्तक ”स्लेवरी टेररिज्य एण्ड इस्लाम-द हिस्टोरिकल रुट्स एण्ड कण्टेम्पररी थे्रट तथा लियोन यूरिस की पुस्तक ”द हज ÓÓका अध्ययन करने पर मुस्लिम जनसंख्या को लेकर किए गए अध्ययन पर चौकानें वाले तथ्य सामने आते हैं जिनसे योगी आदित्यनाथ के बयान में कही बात को बल मिलता है। इन पुस्तकों के मुताबिक जब तक किसी देश में अथवा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी 2 प्रतिशत के आसपास होती है, तब वे एकदम शांतिप्रिय कानून पसंद अल्पसंख्यक बनकर रहते हैं। जैसे कि अमेरिका में 0.6, आस्टे्रलिया में 1.5, कनाडा में 1.9, चीन में 1.8, इटली 1.5 तथा नार्वे में 1.8 प्रतिशत। जब मुस्लिम जनसंख्या 2 से 5 के बीच पहुंच जाती है तब वे अन्य धर्माविलंबियों में अपना धर्मप्रचार शुरू कर देते हैं, जिनमें अक्सर समाज का निचला तबका और अन्य धर्मों से असंतुष्ट हुए लोग होते हैं जैसे कि डेनमार्क में 2 प्रतिशत, जर्मनी में 3.7, ब्रिटेन में 2.1, स्पेन में 4 और थाइलैण्ड में 4.6 प्रतिशत।
मुस्लिम जनसंख्या के 5 प्रशित से ऊपर हो जाने पर वे अपने अनुपात के हिसाब से अन्य धर्माविलंबियों पर दबाव बढ़ाने लगते हैं और अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करने लगते हैं। उदाहरण के लिए वे सरकारों व शॉपिंग माल पर हलाल का मास रखने का दबाव बनाने लगते हैं। वे कहते हैं कि हलाल का मांस न खाने से उनकी धार्मिक मान्यताएं प्रभावित होती हैं। इस कदम से कई पश्चिम देशों में खाद्य वस्तुओं के बाजार में मुस्लिमों की तगड़ी पैठ बनी उन्होंने कई देशों के सुपर-मार्केट के मालिकों को दबाव डालकर हलाल का मांस रखने को बाध्य किया। दुकानदार भी धंधे को देखते हुए उनका कहा मान लेता है अधिक जनसंख्या का फैक्टर यहां से मजबूत होना शुरू हो जाता है। ऐसा जिन देशों में हो चुका वह हैं। फ्रांस जहां मुस्लिम 8 प्रतिशत, फिलीपीन्स 6 प्रतिशत, स्वीडन 5.5, स्विटजरलैण्ड 5.3, नीदरलैंड 5.8तथा त्रिनिदाद और टौबेगो 6 प्रतिशत।
इस बिन्दु पर आकर मुस्लिम सरकारों पर यह दबाव बनाने लगते हैं कि उन्हें उनके क्षेत्रों में शरीयत कानून के मुताबिक चलनेे दिया जाए। जब मुस्लिम जनसंख्या 10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो वे उस देश, प्रदेश, राज्य अथवा क्षेत्र विशेष में कानून व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा करना शुरू कर देते हैं। शिकायतें करना शुरू कर देते हैं। छोटी -छोटी बातों पर विवाद दंगे, तोडफ़ोड़ पर उतर आते हैं। चाहे वह फ्रांस के दंगे हों, डेनमार्क का कार्टून विवाद हो या फिर एस्टर्डम में कारों का जलाना हरेक विवाद को समझबूझ बातचीत से खत्म करने के बजाए और बढ़ाया जाता है। जैसे कि गुयाना में 10 प्रतिशत मुस्लिम, इसराइल में 16 प्रतिशत, केन्या में 11 प्रतिशत और रुस मुस्लिम आबादी 15 प्रतिशत के कारण हुआ।
जब मुस्लिम जनसंख्या 20 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है तब विभिन्न सैनिक शाखाएं जिहाद के नारे लगाने लगती हैं असष्णुता और धार्मिक हत्याओं का दौर शुरू हो जाता है। जैसे इथोपिया में 32 प्रतिशत भारत में 22 प्रतिशत।
मुस्लिम जनसंख्या के 40 प्रतिशत के ऊपर पहुंच जाने पर बड़ी संख्या में सामूहिक हत्याएं, आतंकवादी कार्रवाइयां चलने लगती हैं। जैसे बोस्निया में 40 प्रतिशत चांड में 54.2 प्रतिशत, लेबनान में 59 प्रतिशत। जब मुस्लिम जनसंख्या 60 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है तब अन्य धर्मावलंबियों का जातीय सफाया शुरू किया जाता है उदाहरण (भारत का कश्मीर)जबरिया मुस्लिम बनाना, अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल तोडऩा जजिया जैसा कोई अन्य कर वसूलना आदि किया जाता है जैसे अल्वानिया में 70 प्रतिशत, मलेशिया में 62 प्रतिशत कतर में 78 प्रतिशत और सूडान में 75 प्रतिशत। जनसंख्या के 80 प्रतिशत से ऊपर हो जाने के बाद सत्ता शासन प्रायोजित जातीय सफाई की जाती है। सभी प्रकार के हथकंडे अपनाकर जनसंख्या को 100 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाता है। जैसे बांग्लादेश 83 प्रतिशत, मिस्त्र 90 प्रतिशत, गाजा पट्टी 98 प्रतिशत, ईरान, ईराक, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, सीरीया आदि।
मुस्लिम जनसंख्या 100 प्रतिशत यानी कि दार-ए इस्लाम होने की स्थिति में वहां सिर्फ मदरसे होते हैं और सिर्फ कुरान पढ़ाई जाती है और इसे अंतिम सत्य माना जाता है। जैसे अफगानिस्तान, सउदी अरब, सोमालिया, यमन आदि।
यदि इन आंकड़ों को तथ्थों को सही मान लिया जाए तो भारत में मुस्लिम जनसंख्या 22 प्रतिशत हो जाने की स्थिति बेहद गंभीर कही जा सकती है। ऐसे हालात में योगी आदित्यनाथ के बयान पर हाय तौबा मचाने के बजाए इस स्थिति पर गंभीरता से विचार की जरुरत है। रही बात कांग्रेस की तो उसके लिए यही कहा जा सकता है रस्सी जल गई पर बल नहीं गए।

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योगी के देशराग पर कांग्रेस का विलाप क्यों? Exposing Congress’s Hypocrisy

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Yogi Adityanath’s statements: a wonderful article exposing Congress’s hypocrisy and pointing to imminent danger to India from Islam.

History in the Making- on the Campaign Trail, from USA to India-11

Campaigning in villages near Varanasi: May 2, 6 to 9

(for photos, see Facebook page of <vicharak1>.

We spent several days going door-to-door and also addressing groups of villagers in several villages in Varanasi Loksabha constituency. There were several teams covering different villages. Girishbhai Gandhi (Florida) and I were paired together and we would have a local volunteer from the area to be visited accompany us everyday. We had worked out with a car rental company so every morning a car would be available though the driver would be different. As decided from the beginning we did not solicit any funds from the party. Ours was an independent effort augmenting BJP’s campaign and was supported by our own funds.

Some of the villages that we visited were: Chakia Karadia, Munohua (Sikarganj), Sulvesa, Machhilshahr, Ayodhyapur, Loharapur, Bodalpur, Bakhariya, Kakarahiya, Korauti,, Kotawa, Sirasa, Rohaniya, Kabirpur, etc. Most places, response was very positive. I got the impression that people were so tired of misgovernance, lack of infrastructure and lack of opportunities that they wanted to give a chance to Narendra Modi whose agenda of development was music to their ears. Perhaps, first time, these folks were looking beyond caste labels. No matter which village we visited, their complaint was the same- that no elected leader came back to listen to their problems, that the village head was corrupt, that neither had they enough drinking water, nor had they water for farming, electricity was sporadic, no one cared how poor people lived, etc. We repeatedly explained to them need to unite as a community and elect better representatives. We also took notes so that we could present a brief report to Narendrabhai

In one village we came across a strong AAP supporter. This was a Kurmi Patel. Many of these Patels are supporting BJP. He had choice words for system failure and had reasons to support AAP, whom he thought had solutions to his problems. We had a lively discussion but we had to keep it to the level where he could understand what a vote to AAP would mean.

In our visit to Bakhariya, Kakarahiya, Korauti,, Kotawa, Sirasa, and Rohaniya villages, we were accompanied by two women teachers- Puja Singh and Meena Singh. They were M.A,, B.Eds and quite progressive though in their own home and village they had to be in ghunghat (veil.) We came to know more about the village life, plight of the girls, poor standard of education, etc. from them. They had voted for SP in the last election and were now ruing their decision. Now they were part of BJP’s Women’s wing.

We also had interaction with pro-BJP Muslims in the village of Kotawa. This village had seen an inter-Muslim disturbance the day before we visited it. It so happened that some Muslim office bearers of BJP from other states had come to campaign in this town. There was a deputy minister for minority affairs from Chhattisgarh, Salim Ansari. Then there was Ashfaq Patel, president of BJP Minority Cell, Nagpur. His wife, Jaitunbi Ansari is Deputy Mayor of Nagpur Municipality. While they were distributing the leaflets, they were attacked by local Muslims; reason given was that the leaflets were printed in the holy language, Urdu and when these leaflets were strewn around in the street, it was an insult to the Urdu. However, real reason was the fact that there were Muslims who were favoring BJP. Police had to intervene and next day there was a flag march to ward off any potential trouble. We met with the visiting delegation and pro-BJP supporters from the town. Fortunately, by this time a truce had been reached but media was there to interview people to provide fodder to their communal mill. It was an interesting experience to sit down with the Muslims and listen to them. It was also good to see that some educated Muslims have started to come out of the ghetto mentality.

At Kabirpur village the audience consisted of about 20 women; they were not farmers. They complained bitterly about not having water for their children. Village had only one hand pump which was installed near village head’s home. Though it was meant for use by all, village head’s family was giving hard time to the people who came to use it.

These villagers had to go a mile to a well to fetch water. These women were so agitated that there was a cacophony of voices, all of them speaking at the same time; on top of that Hindi in Varanasi area is a mix of Hindi and Bhojpuri and more so in villages, so half of what they were saying was going over our heads. We found it difficult to pacify them. One woman was asking for help with her young widowed daughter in law who seemed to be in her early twenties. I really felt depressed after this visit, which marked the end of our campaign in Varanasi.

All in all, this has been an awesome experience and I learned a lot. I had come face to face with poor and forgotten Bharat. Since Bharat consists of 70% villages, I can see that the challenges are enormous. I hope Modiji will get support form all quarters to better the lives of these people and give them hope for their future.

I must add that we had generous support from some great souls. Dr. Naresh C. Gupta, a successful businessman, whom we in VHP of America (VHPA) have known for decades through his involvement in Ekal Vidyalaya program, had taken upon himself to pay for our guesthouse stay. There were six rooms booked for an average of seven days with each one costing about Rs. 900 per day. He also invited us for dinner more than once. Dr. Bhupendra Kumar Modi, head of Modi conglomerate treated all NRis to a lavish dinner at a four star hotel. Separately, Mrs. Veena Modi invited us for a dinner at Taj hotel. We have known Modis from late 90’s when they were involved with VHPA’s Dharma Prasar Yaatra and United Nation’s Millennium Peace Summit in 2000. Mrs. Modi presented all NRIs with a box of Banaras’s famous sweets.Wherever we went, we were warmly received. Villagers always offered something to eat. They were overwhelmed that some one from as far as America had come to listen to them. In turn we felt deeply connected to them.

I hope for an improved future for these villagers, where they would have all the basic necessities of life such as roads, water, electricity, healthcare and education and enough opportunities to make a decent living. May this election be a game changer in that sense.

On the last day, we took time out to visit Kashi Vishwanath Mandir and take dip in Gangamaiya at Assi ghat. I will write about it some time in future.

We returned to Amdavad on 11th and as I wrote all these reports (now that I have easy access to the Internet and Wi Fi), I have relived the wonderful experience.

Massive Communal Disturbances around Kolkata- Please Publicize

We have received this email today.  Please spread the word. if you are in West Bengal, try to verify.

Thank you.

On Tue, Feb 19, 2013 at 2:50 PM, Tapan Ghosh <tapanghosh6@gmail.com> wrote:

Plz try to forward it to PTI, UNI, and other media houses.

molestation

S. P. of South 24 Parganas dist. Mr. Praveen Tripathi – 033 2479 3333.

Area of disturbance – Village – Herobhanga, P.S. – Canning.

Tens of thousands of Muslims from outside gathered there. Large scale looting / arson of Hindu houses of Nolekhali village going on. Police is there. But police officer seriously injured. 2 police vehicles burnt.

Disturbances spreading to other PS areas like Basanti, Joynagar, Kultali.

Train stopped on Sealdah – Canning line.

Media black out.

All these are happening in reaction of murder of one Moulavi last night. Nobody knows who is this Moulavi, why he is murdered, who murdered him.

In the area of Herobhanga, as far as I know, there is no existence of any Hindu organisations.

Where the dead body of the Moulavi found, the nearest village ‘Nolekhali’ has been fully burnt down – about 100 houses.
Police is not allowing any media to enter the village.
Severe molestation of 5 Hindu women including Lakshmi Naskar (38Year ) by Muslims took place at Kholakhali (under Joynagar PS, but bordering Kultali PS).

Now Muslims are assembling and gheraoing Canning P.S.

Road blockade at many places like Natunhat, Priyor More (Joynagar PS), Bhangankhali (Basanti PS).

Already spread to Sandeshkhali PS of North 24 Parganas dist.

Kolkata – Basanti Road has been blocked at Boyarmari.

Sanjay Singh, resident of Boyarmari, CRPF jawan posted at Goaltor PS of Medinipur dist. has been beaten up at Boyarmari for refusing to get down from his bi-cycle.

 

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